वरदान
रूप निखरने लगा है मेरा
चेहरे की महीन लकीरों
और झुर्रियों के झुरमुट में
हर लकीर में कैद हैं
कुछ खट्टे मीठे अनुभव
कुछ राज़
और कुछ सुनहरी यादें
काले बालों से झाँकती है
हलकी सफेदी
जैसे काली गहरी रात में
बिखर जाती है चांदनी
और रोशन कर देती है
हर ज़र्रे को
ढलता शरीर थिरकने लगता है
बीते वक़्त की ताल पर
और कयानात पीठ थपथपाती है मेरी
ठंडी हवा होले से
कान में फुसफुसाती है
"मुझे नाज़ है तुम पर ,,,
इसे कहते हैं ज़िंदादिली से जीना "
और
मुझे एकाएक अहसास होता है कि
उम्र का यह पड़ाव
किसी वरदान से कम नहीं
यह तो एक खज़ाना है
अनुभवों का
जो मैं अभी अपनों में बाँट रही हूँ
और इसे में यहीं एक दिन
मेरे अपनों के लिए छोड़ जाऊँगी
सिम्मी मदन मैनी
चेहरे की महीन लकीरों
और झुर्रियों के झुरमुट में
हर लकीर में कैद हैं
कुछ खट्टे मीठे अनुभव
कुछ राज़
और कुछ सुनहरी यादें
काले बालों से झाँकती है
हलकी सफेदी
जैसे काली गहरी रात में
बिखर जाती है चांदनी
और रोशन कर देती है
हर ज़र्रे को
ढलता शरीर थिरकने लगता है
बीते वक़्त की ताल पर
और कयानात पीठ थपथपाती है मेरी
ठंडी हवा होले से
कान में फुसफुसाती है
"मुझे नाज़ है तुम पर ,,,
इसे कहते हैं ज़िंदादिली से जीना "
और
मुझे एकाएक अहसास होता है कि
उम्र का यह पड़ाव
किसी वरदान से कम नहीं
यह तो एक खज़ाना है
अनुभवों का
जो मैं अभी अपनों में बाँट रही हूँ
और इसे में यहीं एक दिन
मेरे अपनों के लिए छोड़ जाऊँगी
सिम्मी मदन मैनी
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