Thursday, 4 August 2016

मंगल भारी है

      मंगल  भारी  है

होगा गठबंधन कुत्ते संग
अभी प्रथा ये जारी है
नारी अपमान सहती जाएगी
क्योंकि मंगल भारी है

बढ़ते अंधविश्वास
और दबी हँसी में
इक बेटी फिर हारी है
आत्मसम्मान फिर छलनी होगा
क्योंकि मंगल भारी है

कुत्ता पहला पति बनेगा
हुआ फरमान यह जारी है
वह ही पहले मांग भरेगा
 क्योंकि मंगल भारी  है

स्वयं बेटी का करें अमंगल
खुद उसका सम्मान हरें
शिक्षित होकर डर से हारें
बेटी कुत्ते  को दान करें

बेटी के मन की व्यथा तो सोचो
वो अपनों से हारी है
क्या कसूर बेटी का इसमें ?
हुआ जो मंगल भारी है

सिम्मी  मदन  मैनी  

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