मंगल भारी है
होगा गठबंधन कुत्ते संग
अभी प्रथा ये जारी है
नारी अपमान सहती जाएगी
क्योंकि मंगल भारी है
बढ़ते अंधविश्वास
और दबी हँसी में
इक बेटी फिर हारी है
आत्मसम्मान फिर छलनी होगा
क्योंकि मंगल भारी है
कुत्ता पहला पति बनेगा
हुआ फरमान यह जारी है
वह ही पहले मांग भरेगा
क्योंकि मंगल भारी है
स्वयं बेटी का करें अमंगल
खुद उसका सम्मान हरें
शिक्षित होकर डर से हारें
बेटी कुत्ते को दान करें
बेटी के मन की व्यथा तो सोचो
वो अपनों से हारी है
क्या कसूर बेटी का इसमें ?
हुआ जो मंगल भारी है
सिम्मी मदन मैनी
होगा गठबंधन कुत्ते संग
अभी प्रथा ये जारी है
क्योंकि मंगल भारी है
बढ़ते अंधविश्वास
और दबी हँसी में
इक बेटी फिर हारी है
आत्मसम्मान फिर छलनी होगा
क्योंकि मंगल भारी है
कुत्ता पहला पति बनेगा
हुआ फरमान यह जारी है
वह ही पहले मांग भरेगा
क्योंकि मंगल भारी है
स्वयं बेटी का करें अमंगल
खुद उसका सम्मान हरें
शिक्षित होकर डर से हारें
बेटी कुत्ते को दान करें
बेटी के मन की व्यथा तो सोचो
वो अपनों से हारी है
क्या कसूर बेटी का इसमें ?
हुआ जो मंगल भारी है
सिम्मी मदन मैनी
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