तेज़ाब
माँ !
तुम और मैं इतने अलग क्यों दिखते हैं ?
नन्ही पीहू बोल पड़ी
क्या में भी बड़ी होकर तुमसी दिखने लगूँगी ?
लक्ष्मी ने झट से मासूम पीहू को
बाँहों के घेरे में समेट लिया
और मुस्कुराते हुए बोली
नहीं बेटा ,,,
मेरी पीहू तो परी सी दिखेगी
गले लगी पीहू ने
माँ के माथे को चूमा
और परीलोक में खो गई
लक्ष्मी अब भी तेज़ाब की जलन
सीने में महसूस कर रही थी
धधकते दिल ने अंदर से आवाज़ दी
देखना लक्ष्मी
अब किसी नारी के लिए
मर्द को ना कहना
इतना दर्दनाक ना हो
अब कोई लक्ष्मी
यह घाव ना झेले
और ना ही कोई पीहू
अपनी माँ से यह सवाल पूछे
अब कभी ऐसा नहीं होगा
लक्ष्मी दृढ़ता से बोली
क्योंकि अब बाज़ार में
तेज़ाब की बिक्री पर रोक है
रोक है मर्द को ज़बरदस्ती
हाँ कहलवाने पर
रोक है किसी जानवर के
सरेआम घूमने पर
और यह लड़ाई मुझ अकेली की नहीं
लाखों बहने हैं मेरे साथ
हम देखेंगे कि
भविष्य में हर एक पीहू
अपनी हाँ और ना की
मालिक खुद हो
सिम्मी मदन मैनी
माँ !
तुम और मैं इतने अलग क्यों दिखते हैं ?
नन्ही पीहू बोल पड़ी
क्या में भी बड़ी होकर तुमसी दिखने लगूँगी ?लक्ष्मी ने झट से मासूम पीहू को
बाँहों के घेरे में समेट लिया
और मुस्कुराते हुए बोली
नहीं बेटा ,,,
मेरी पीहू तो परी सी दिखेगी
गले लगी पीहू ने
माँ के माथे को चूमा
और परीलोक में खो गई
लक्ष्मी अब भी तेज़ाब की जलन
सीने में महसूस कर रही थी
धधकते दिल ने अंदर से आवाज़ दी
देखना लक्ष्मी
अब किसी नारी के लिए
मर्द को ना कहना
इतना दर्दनाक ना हो
अब कोई लक्ष्मी
यह घाव ना झेले
और ना ही कोई पीहू
अपनी माँ से यह सवाल पूछे
अब कभी ऐसा नहीं होगा
लक्ष्मी दृढ़ता से बोली
क्योंकि अब बाज़ार में
तेज़ाब की बिक्री पर रोक है
रोक है मर्द को ज़बरदस्ती
हाँ कहलवाने पर
रोक है किसी जानवर के
सरेआम घूमने पर
और यह लड़ाई मुझ अकेली की नहीं
लाखों बहने हैं मेरे साथ
हम देखेंगे कि
भविष्य में हर एक पीहू
अपनी हाँ और ना की
मालिक खुद हो
सिम्मी मदन मैनी
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