Monday, 29 August 2016

मैं भी खेलूँगी

मैं भी खेलूँगी

मैं भी खेलूँगी मईया
भाई के संग संग
खिलने दे बाबुल मुझको
मैला ना कर मन


स्वर्ग बनाऊँगी मैं
घर को सजाऊँगी मैं
आने दे बगिया में
मैला ना कर मन

हाथ बटाऊंगी मैं
साथ निभाऊँगी मैं
कुछ भी ना चाहूँगी
बदले में माँ सुन


कहता है मन यह मुझसे
रिश्ता पुराना तुझसे
कर्मो के बंधन हैँ
झटका ना दामन


मैं भी खेलूँगी मईया
भाई के संग संग
खिलने दे बाबुल मुझको
मैला ना कर मन


सिम्मी मदन  मैनी






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