Monday, 29 August 2016

   सफ़ेद दाग ( leukoderma )


तन पर बिछते सफ़ेद दाग
अब झाँकने लगे हैं
कपड़ों के परतों से
लगातार फ़ैल रहे हैं
शरीर के हर हिस्से पर
शायद अपनी पहचान बनाना चाहते हैं

मैंने उनसे होले से पुछा
क्या झगड़ा है तुम से मेरा ?
तुम क्यों मुझ पर हावी होना चाहते हो ?
तुम्हारे होने से
लोग दूर भागने लगे हैं मुझसे

तभी सफ़ेद दाग
बड़ी मासूमियत से बोले
तुम्हे नहीं लगता कि
हम उन काले दागों से बेहतर हैं
जो तुमसे दूर भागने वालों की
आत्मा पर पहरा देते हैं

कम से कम
तुम्हारी आत्मा पर तो
 कोई दाग नहीं 


यह सुन कर
मैंने अपने सफ़ेद दागों को
कपड़ों की परतों से आज़ाद कर दिया
अब वो भी मेरे संग
 खुली हवा में सांस लेने लगे
और उन्होंने
मेरी जिस्मानी और रूहानी ख़ूबसूरती में
चार चाँद लगा दिए

सिम्मी मदन  मैनी




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