Friday, 30 May 2014

कहानीकार ( scriptwriter)

 

                 कहानीकार ( scriptwriter)

हम सभी
कहानियाँ  गढ़ने में माहिर हैं
सबके अंदर एक कहानीकार
छिपा  बैठा है
जो अंदाज़े लगाता  है
वो ऐसा होगा,,,,,
वो वैसा होगा ,,,,,,
ऐसा ही हुआ होगा ,,,,,
वो ऐसा सोचता होगा,,,,
जान बूझ कर ऐसा किया होगा ,,,,
सभी तो अपनी सोच के घोड़े
दौड़ते हैं ,,,
कल्पनाओं की कच्ची धरातल पर

और इसी बेबुनियाद फ़र्ज़ी ज़मीन पर
ज़िन्दगी के कड़े फैसले होते है जब
तो,,,,,,
सिवाय दुःख के
और कुछ नहीं देते
कहानियाँ जो बड़े परदे पर हिट होती हैं
वास्तविक जीवन में
पैरों तले  की ज़मीन खींच लेती हैं
और इंसान
टूटे रिश्तों की बंजर ज़मीन पर
अकेला हो जाता है

सिम्मी मैनी
30/05/2014

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