जवाबदारी
आप ही बतलाईये ज़रा
भला प्रेम और डर भी क़भी
एक मायन में रह सकते हैं ?फिर क्यों कहते हैं हम कि
कुछ भी करने से पहले
उस ऊपर वाले से डरो
कमाल है
उससे डरे ,,वो जो
पिता है
दया का सागर है
बिना किसी शर्त के
आपार प्रेम करता है हमसे
सच मानिए
यदि ऐसा है तो
पिता और सन्तान के सम्बन्ध पर
एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है
जहाँ डर है
वहां कैसे होगी
उससे दिल की बात
और फिर रिश्ते में
दरार तो आ ही जाएगी
इसलिए डरो मत
बस इतना सोचो कि
अपने हर कर्म की जवाबदारी
अपने उस पिता को देनी है
फिर देखना
हमारी यही सोच हमे सदा
सही रास्ता दिखलाएगी
और उसके साथ हमारा रिश्ता
अमर हो जाएगा
सिम्मी मदन मैनी
06/05/2014
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