Friday, 2 May 2014

ज़िंदगी एक पैकेज

         
       
ज़िंदगी एक पैकेज
   

ज़िन्दगी एक पैकेज है
अच्छे और बुरे का
इसमें खटास है उन परिस्थितियों की
जो मुझे पल में गिरा दें
और मिठास उन घटनाओं की
जो सातवें आसमान पर बिठा देँ
कुछ रिश्ते जो अंतर को
प्रेम से भर दें
और कुछ लोग जो
भीतर तक खोखला कर दें

बड़ा गहरा संतुलन है
सुख और दुख का
और यह तराज़ू परमात्मा के हाथ
जो मेरे कर्मों के बेहिसाब खातों को
शिद्दत से संभालता है
जब दुख से सामना होता  है
और साँस घुटने लगती है तो
सुख का मरहम लग कर
रिसते घाव भर देता  है


पिता है तो सब जानता है कि
बारी बारी से
मेरे कर्मों के खाते से
कब , क्या  और कितना देना  है
क्योंकि
इस शरीर में उसे मुझे तब तक
ज़िंदा रखना है
जब तक
मैं  इस जीवन का अन्तिम पाठ
ना  पढ़ लूँ

सिम्मी मदन  मैनी 
03/05/2014


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