रिश्ता दोस्ती का
सुना है ,,,
रिश्ते ऊपर से बन कर आते हैं
जो जीवन का अटूट हिस्सा
हो जाते हैं,,,
और खून के रिश्ते कहलाते हैं
पर एक रिश्ता
जो इनसे भी ऊपर है
जो मेरे ख्यालों में रहता है
जिसे में खुद ढालती हूँ
और सजाती ,सँवारती हूँ
बन जाता है ,,,,
रिश्ता दोस्ती का
जाने क्यों ?
तुम्हारी हर बात प्यारी लगती है
तुम में कभी कोई कमी नज़र नहीं आती
बिना रुके घंटों
तुमसे दिल की हर बात कर सकती हूँ
जानती हूँ कोई मुझे भी सुनता है
ठीक और गलत के तराज़ू में तोले बिना
जाने कैसे तुम कैसे ?
मेरे दिल की हर बात
मेरी सांसों से पहचान लेती हो
कभी मेरी छोटी सी गलती पर
गुरु की तरह करारी फटकार लगाती हो
तो कभी ,,,,
मेरी छोटी से उपलब्धी पर
माँ की तरह पीठ थपथपाती हो
कैसे तुम मुझे मेरी ही नज़रों में
ऊँचा उठा देती हो
यह अटूट विशवास ही तो है तुम पर
कि बिना सोचे और सवाल किये
तुम्हारे एक इशारे पर
अंगारों पर भी चल सकती हूँ
ऐ दोस्त !
तुम्हे बस इतना कहना है कि
तुम मेरे कई जन्मों के
श्रेष्ठ कर्मों का फल हो ,,,,,
सिम्मी मैनी
17/05/2014
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