Wednesday, 7 May 2014

माली

कई बार सोचती हूँ कि हम जीवन में आगे बढ़ जाते है , किसी बडे मुकाम पर भी पहुँच  जाते है और प्रशंसा और रुतबे को गले से लगा  लेते है पर उस मुकाम तक पहुंचने के लिये जिन सीढ़ियों का इस्तेमाल करते है क्या हम  उन्हे याद रखतें हैँ l हमारे जीवन में कई रिश्ते हमें प्रेम, सहायता और समझदारी  से सींचते है जैसे माँ बच्चे को निस्वार्थ प्रेम के झूले में झुलाती है ,गुरु शिष्य को आगे बढ़ाने में अपना सर्वस्व ज्ञान उस पर लुटा देता है और सच्चे दोस्त सदा  होंसला  बढाते  हैं और बिना कहे ही  दिल की छोटी से छोटी  बात समझ लेते हैं l मेरी यह रचना इन्ही महान रिश्तों को समर्पित --

                     माली

फूल की खुशबू
बिखर जाती है सदाओं में
और हर कोई उसे देख
मंत्रमुग्ध  हो जाता  है
प्रभु के चरणों में
चढ़ जाता है गर्व से
और
अपने अस्तित्व पर इतराता है
नाम और मान का चाँद भी  चमकता है
इस पुष्प के जीवन में
और उसकी चांदनी में
चुपके से अमर हो जाता है
पर जो सींचता है
अपने खून पसीने से
इस सुन्दर वृक्ष को
ताकि
यह सुमन जन्म ले सके
जाने वो माली
प्रशंसा की भीड़ में
कहाँ खो जाता  है ?

सिमी मदन  मैनी
08/05/2014






No comments:

Post a Comment