मेकअप
कल रात पार्टी में मुलाकात हुईचलते फिरते मोम के पुतलों से
मुस्कुराते चेहरे और उन पर
मेकअप की गहरी परते
त्वचा के हर श्वास छीनता
और
चेहरे के दाग धब्बों को छिपाने की
नाकामयाब कोशिश करता पाउडर
पसीने से लड़ कर बाहर झांकती त्वचा
जो शायद आज़ादी की सांस लेना चाहती है
सोचती हूँ यह मेकअप शायद पल भर को
चेहरे की कुरूपता को ढक भी ले
पर आत्मा पर जो
दान,ढोंग ,ध्यान ,राजनीति और धर्म का
मेकअप लगाया है
वो भला
ईर्ष्या , नफरत ,दिखावे और द्धेष के धब्बों को
कब तक और कैसे छिपा पाएगा ?
कभी तो सच के पसीने से
दिल दहला देने वाली असलियत से
सामना हो ही जाएगा
इसलिए चेहरे और आत्मा पर
जितना मेकअप कम हो उतना ही अच्छा
क्योंकि
कृत्रिम सुंदरता शरीर और आत्मा दोनों को
और अधिक कुरूप बना देती है शायद ,,,,
सिम्मी मैनी
16/05/2014
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