Thursday, 15 May 2014

मेकअप

   
          मेकअप

कल रात पार्टी में मुलाकात हुई
चलते फिरते मोम के पुतलों से
मुस्कुराते चेहरे और उन पर
मेकअप की गहरी परते
त्वचा के हर श्वास छीनता 
और
चेहरे के दाग धब्बों को छिपाने की
नाकामयाब कोशिश करता पाउडर
पसीने से लड़ कर बाहर झांकती त्वचा
जो शायद आज़ादी की सांस लेना चाहती है

सोचती हूँ यह मेकअप शायद पल भर को
 चेहरे की कुरूपता को ढक भी ले
पर आत्मा पर जो
दान,ढोंग ,ध्यान ,राजनीति और धर्म का
मेकअप लगाया है
वो भला
 ईर्ष्या , नफरत ,दिखावे और द्धेष के धब्बों  को
कब तक और कैसे छिपा  पाएगा ?
कभी तो सच के पसीने से
दिल दहला देने वाली असलियत से
सामना हो ही जाएगा
इसलिए चेहरे और आत्मा पर
जितना मेकअप कम हो उतना ही  अच्छा
क्योंकि
कृत्रिम सुंदरता शरीर और आत्मा दोनों को
और अधिक कुरूप बना देती है शायद ,,,,

सिम्मी मैनी
16/05/2014

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