हमेशा से सुनते आये कि अपने शब्दों का चुनाव समझदारी से करो क्योंकि यह शब्द ही है जो किसी को पल में अपना और पल में परया कर देते हैं ,,,यह शब्द ही है जो किसी को आकाश की ऊँचाइयों में तो किसी को पाताल की गर्द में पहुँचा देते है ,,,,यह शब्द ही हैं जो किसी को कामयाब तो किसी को नाकामयाब बना देते हैं ,,,,हर शब्द अपने आप में हमारी सोच की ऊर्जा समेटे हुए है ,,,,
बाँध ( DAM )
जब किसी की ज़ुबाँ से
फिसलते हैं शब्द
तो क़यामत आती हैआत्म नियंत्रण की
कच्ची दहलीज़ को तोड़ते
जा गिरते हैं वक्त की
गहरी खाई में
और किसी अपने के मन को
घायल करते हैं
तीर की तरह भेद देते हैं
दिलों को ,,,
और लाख चाहने पर भी
कमान में वापिस नहीं आते
यूँ तो मन में बहुत से शब्द रहते हैं
और बड़ी रफ़्तार से दिन रात
नदी के तेज़ धारे से बहते हैं
पर यदि ,,,
धीरज और समझदारी का बाँध पक्का हो
तो विकराल बाढ़ का रूप लेकर
रिश्तों की फसल को
बर्बाद नहीं करते
सिम्मी मैनी
26/05/2014
No comments:
Post a Comment