दरिया
आज फिर एक ख्याल ने
दिल पर दस्तक दी है किगर में इक दरिया हूँ
तो मेरा काम बहना है
बिना रुके ,बिना थमे
हर पल , हर क्षण
सिर्फ मंज़िल कि और बहना
इस बहते जीवन में
रिश्तों के कई मुकाम आते हैँ
कुछ चट्टान बन राह रोकते है
और कुछ
लक्ष्य कि ओर पहुँचाते हैं
कर्मानुसार इन रिश्तों से
मिलने और बिछड़ने का समय
पहले से निर्धारित है
उसमें कोई चूक नहीं
हर रिश्ता मुसाफिर के सफ़र मेँ
आने वाला एक स्टेशन है
बस घडी भर रुकना है और
आगे बढ़ जाना है
यह जान कर भी
इन रिश्तों में मोह
और दोषारोपण कैसा ?
सिम्मी मैनी
12/05/2014
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