Saturday, 11 February 2012

ज़मीर.........

       ज़मीर

बात तो मैं तुमसे
हरदम करता हूँ
तुम अनसुना कर दो
तो मैं क्या करूँ?
बताता हूँ तुम्हे
सही ,ग़लत का फर्क
तुम ध्यान ना दो तो 
मैं  क्या करूँ?
मैं बसता हूँ 
हर एक में
कोई कैसा भी हो
और वक़्त आने पर
तुम्हे तुम्हारी
सही पहचान और
औकात दिखा देता हूँ
क्यों इस कदर हैरानी से
देखते हो मुझे
मैं तुम्हारा ज़मीर हूँ

सिम्मी मैनी 

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