Thursday, 23 February 2012

जो समय दिखाए .........

     जो समय दिखाए

तू जो समय दिखाए- सर माथे
चाहे सुख हो दुःख हो- सर माथे
फूल हो ,शूल हो
प्रेम, घ्रिनाह
सब कर्मो का लेखा-सर माथे


रंगमंच के पात्र
सभी  हम
तू  सब खेल
रचाए  है
डोरी खिंचते ही
नाच उठे हम
तुझ बिन सभी
पराये हैं
तू दया दिखा दे-सर माथे
चाहे सज़ा सुना दे-सर माथे
सुन ले अब तो
ओ सुखदाता
तू जो भी चाहे-सर माथे

पतितो को तू
पवन कर दे
निर्मल को
दे दे काया
तूने जिसकी
बांह पकड़ ली
वो तो भव से
तर आया
तू पार लगा दे-सर माथे
मेरी भूल बता दे-सर माथे
सद्गुणों के भंडार
हो दाता
तेरे नाम का अमृत -सर माथे

तू जो समय दिखाए-सर माथे
चाहे सुख हो दुःख हो-सर माथे

सिम्मी मैनी        

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