यह रचना मेरे दिल के सबसे ज्यादा करीब है....यह रचना मैंने तब लिखी जब मुझे मंच पर अपनी दो रचनाएँ प्रस्तुत करनी थीं
दिल में डर और चिंता के भाव उमड़ रहे थे....समझ नहीं पा रही की कौनसी रचनाएँ प्रेषित करूँ......अपनी कोई भी कृति इतने
गुणी लोगों में रखने लायक नहीं लग रही थी......बस इसी कशमकश में इस रचना का जन्म हुआ.....शायद आपको पसंद आये
फरवरी 05 ,2012सिम्मी मैनी
मेरी बेटी- कविता
यह है मेरी बेटी
कविता........
मेरा मान
मेरा सम्मान
मेरे दिल में
इसका बचपन बीता
और यह मेरे अनुभवों में
जवान हुई
आज बिदाई का
वक़्त भी आ गया
दिल तो डरेगा ही
माँ हूँ ना.........
बड़ी किस्मत वाली है कविता
आप जैसे गुणी लोगों से
नाता जो जुड़ रहा है
अभी कच्ची उम्र है
तो थोड़ी नादान है
कुछ कमियाँ भी होंगी
पर मुझे चिंता नहीं
जानती हूँ आप सब
बड़े दिल वाले
विद्वान् लोग हैं
जब एक हाथ से ठोकेगें
और एक हाथ से पुचकारेंगे
तो कच्ची मिटटी है
आप ही के सांचे में
ढल जाएगी
आज मुँह दिखाई की
रस्म भी होगी
क्योंकि वह मेरा अंश है
और मेरी परछाई भी
तो आज मेरी भी
परीक्षा होगी
सब परखेंगे
माँ से मिले संस्कार
और गुण
और कविता भी आज
अपना हक़ मांगेगी
माँ से
पर मैं क्या दे सकती हूँ भला?
और फिर मेरा आपसे
क्या मुकाबला?
हो सकता है आपकी भी
कुछ उम्मीदें हों
पर दहेज़ में देने को
ना तो मेरे पास
भारी आलंकृत शब्द हैं
और ना ही साहित्य का
गूढ़ ज्ञान......
अगर कुछ है
तो वो है
रगों में बहता अटूट प्रेम
ईमानदारी के शब्द
और
सच की स्याही से
भरी कलम
बस इन्ही के सहारे
मैं अपनी कविता
आप सबको सौंपती हूँ
अब यह मेरी नहीं
आपकी इज्ज़त है
कुछ दिन आपकी
सौबत में रहेगी
तो आप ही जैसी
हो जाएगी
मैं खुश हूँ
एक माँ को भला
और क्या चाहिए
मेरी बेटी ख़ुशी ख़ुशी
अपने घर पहुँच गयी
क्या आप इसे अपना
आशीर्वाद नहीं देंगे?
सिम्मी मैनी
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