Sunday, 26 February 2012

मैं क्यों आई ?.....

मैं क्यों आई ?


सदियाँ बीतीं 
खुद से बात किये
संकल्पों के शोर में
मेरी आवाज़
दब सी जाती है

कहने को तो
आँखें सोती हैं 
हर रोज़ घंटों 
पर आत्मा की पलकें 
अब भी भारी हैं

काश!
सो जाएँ सब विचार
पल भर को
और शायद
खुद से बात हो जाये

मुमकिन है मिल जाएँ 
उन सब प्रशनो के उत्तर 
जो मन के भीतर कब से 
कुलबुलाते हैं
और शायद में ये भी 
जान जाऊं ........
कि
मैं इस दुनिया में क्यों आई ?
मैं इस दुनिया में क्यों आई ?

सिम्मी मैनी         

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