Tuesday, 22 November 2011

मैं कितनी सुन्दर हूँ .....

              मैं कितनी सुन्दर हूँ

पोंछ रही हूँ दर्पण,
और निहार रही हूँ खुद को,
छोटा कद, थोडा गुदा शरीर ,
बालों से झांकती हलकी सफेदी,
 उम्र का तकाज़ा करती ,
चेहरे की बारीक लकीरें ,
और सांवला रंग,

आज देखती हूँ दर्पण ,
एक नए अंदाज़ से,
और पाती हूँ ,
कि मैं कितनी सुंदर हूँ

आज भी झूठ बोलने में झटपटाहट होती है,
आज भी दूसरों के पीड़ा देख  आँख नम  हो जाती है,
आज भी किसी का दिल दुखाने से डर लगता है,
आज भी दुआ के लिए हाथ उठते हैं,
आज भी एहसास जीवित है मुझमे,
आज भी लोग मुझ पर भरोसा करते हैं,
कहते हैं दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता,
यकीन मानिये उसी ने बताया मुझे,
कि मैं बहुत सुंदर हूँ,
आप ही कहिये ,कहीं यह मेरा भ्रम तो नहीं ....

सिम्मी मदन  मैनी


2 comments:

  1. nahin ji ye aapka bhram nahin aap yakinan sundar hain ...man ki sundarta ki jo baat aapne kahi hai wo sachmuch tareef ke kaabil hai ..dil se daad aapko :)

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  2. aap ke anmol shabad aage badhne ko prerit karte hain,,,,shukriya tahe dil se

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