यह रचना मुझे अति प्रिय है lयह रचना दो वर्ष पहले मैंने उस रात लिखी जब ईशान, अन्शुम ने मुझे बताया कि वो बाहर जा कर पढना चाहते हैं l इस रचना में मेरा दर्द और चिंता दोनों छिपे हैं l यह रचना मैंने लिखी ज़रूर है पर यह विचार ईशान ,अन्शुम के हैं l यह रचना एक माँ की भेंट है अपनी संतान को l
पहली उडान
माँ अब मुझे जाने दो,
और भरने दो जीवन की पहली उड़ान ,
मुक्त करो मुझे चिंता और प्रेम के बंधन से,
भरोसा करो खुद की परवरिश पर,
जनता हूँ कई सपने संजोये हैं तुमने,
पर तुमने कैसे सोचा टूटने दूंगा उन्हें,
सिर्फ इसलिए,
कि मेरी सोच कि राह अलग है,
जब सोच को मिल जाएगी पसंद कि राह,
तो जी लूँगा पूरी ज़िन्दगी पहली उड़ान में,
देख लेना तुम्हे पहुँच कर दिखाऊँगा वहां,
जहाँ तुम्हारा सपना न पहुंचा होगा कभी,
और अगर थक कर गिर भी जाऊं ,
तो बस प्रेम भरी निगाह से देख लेना मुझे,
और हौले से कान में कहना,
में हूँ ना,
सिर्फ तुम्हारा ये कहना,
कर देगा मुझमे नई सफुर्ती का संचार,
फिर से उठ कर उड़ने लगूंगा में,
और प् लूँगा अपने मंजिल,
माँ अब मुझे जाने दो,
और भरने दो जीवन कि पहली उड़ान......
सिम्मी मैनी.
पहली उडान
माँ अब मुझे जाने दो,
और भरने दो जीवन की पहली उड़ान ,मुक्त करो मुझे चिंता और प्रेम के बंधन से,
भरोसा करो खुद की परवरिश पर,
जनता हूँ कई सपने संजोये हैं तुमने,
पर तुमने कैसे सोचा टूटने दूंगा उन्हें,
सिर्फ इसलिए,
कि मेरी सोच कि राह अलग है,
जब सोच को मिल जाएगी पसंद कि राह,
तो जी लूँगा पूरी ज़िन्दगी पहली उड़ान में,
देख लेना तुम्हे पहुँच कर दिखाऊँगा वहां,
जहाँ तुम्हारा सपना न पहुंचा होगा कभी,
और अगर थक कर गिर भी जाऊं ,
तो बस प्रेम भरी निगाह से देख लेना मुझे,
और हौले से कान में कहना,
में हूँ ना,
सिर्फ तुम्हारा ये कहना,
कर देगा मुझमे नई सफुर्ती का संचार,
फिर से उठ कर उड़ने लगूंगा में,
और प् लूँगा अपने मंजिल,
माँ अब मुझे जाने दो,
और भरने दो जीवन कि पहली उड़ान......
सिम्मी मैनी.
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