Friday, 18 November 2011

जीवन का सार

कई बार जीवन मैं छोटी छोटी घटनाएँ भी हमें बहुत कुछ सिखा जाती हैं l  यह कविता मैंने उस रात लिखी जिस रात मेरे चेहरे पर  खौलते  तेल की चंद  बूंदे गिरी l यकीन मानिए इन चंद बूंदों ने मेरी जड़ो को हिला दिया l


                                      जीवन का सार 
आज खाना बनाते हुए 
खौलते तेल की चंद बूंदे
जो  मेरे चेहरे पर पड़ी 
तो मुझे जीवन का
सार  सिखा गयी ,

बदसूरत चेहरे के अहसास से
सिहर  उठी मैं ,
और भागी
आईने  की ओर ,
देख रही हूँ खुद को
आईने  में हर कोण से 
और सोच  रही हूँ कि
किस तरह छिपाऊँ
अपने चेहरे को आँचल से 
कि आप मेरे चेहरे के
दाग  न देख पाएं


रात भर करवटें बदलती रही 
और सोचती रही कि 
आज वैध का मरहम
ठीक  कर देगा चेहरे के दाग 
पर सालों से
आत्मा  पर जो दाग 
और लाखों करोड़ों
मैल की परतें हैं 
उनके लिए मरहम
कहाँ  से लाऊँ ?
तन की सुन्दरता के लिए
चिंतित  हूँ 
और मन की कुरूपता का
एहसास  तक नहीं 

प्रभु जिस तरह
पल  भर में तुमने
छीन  लिया  रंग रूप 
उसी तरह किसी भी पल
तुम   छीन सकते हो ,
मेरा नाम, मेरी पहचान
मेरा रुतबा, मेरा सम्मान
और अगर इसी पल
ले  लिए मेरे प्राण
तो जीवन व्यर्थ ही
 गुज़र गया मेरा

नींद से उठ बैठी मैं ,
और पता चला कि,
अभी बहुत कुछ
करना  बाकी है
छोटी से ज़िन्दगी
और  बड़े बड़े काम,
चलो जब जागे
 तभी सवेरा

आज खाना बनाते हुए 
खौलते तेल की चंद बूंदे
जो  मेरे चेहरे पर पड़ी 
तो मुझे जीवन का
 सार सिखा गयी ......

सिम्मी मैनी 


2 comments:

  1. kya kahoon aapki kavitaa ne jhakjhor diya hai bilkul ...sachmuch aapne yaad dila diya abhi bahut kuch karna hai abhi to kuch kiya hi nahin ...chhoti chhoti baaton me ghoodh darshan ki baaten jaise aap karti hain wo kaabil e tareef hai ..!!!

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  2. dhanyawad,,,,aapko rachna pasand aayi mujhe is baat ki khushi hai

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