Wednesday, 23 November 2011

बात ही कुछ और है .....

          बात ही कुछ और है

अब आप इसे मेरा गुरुर कहें,
तो गुरुर ही सही,
पर उसकी और मेरे रिश्ते की,
बात ही कुछ और है,

मैं बस कहती जाती हूँ,
और घंटो आराम से सुनता जाता  है वो,
मैं कुछ मांगू तो सही,
ज़मीन आसमान एक कर,
मेरी पसंद लाता है वो,
अगर कभी उदास होती हूँ,
तो मुझसे मिलने को मचल उठता है,
अगर पलक से एक आंसू गिर जाये,
तो तड़प जाता है वो,
अगर मैं रूठ जाऊं कभी  ,
तो मेरे सभी नाजो नखरे उठता है वो,
घर के चक्कर लगता है,
और सपने में आ कर ,
मनाता है वो,
नींद न आये जो मुझे,
तो लोरी गा कर  सुलाता है वो,
गलती करता है तो ,
डांट भी देती हूँ मैं उसे,
बड़ी मासूम शक्लें बनाता है वो,

सिर्फ वो है जो मुझे,
 सम्पूर्णता  का एहसास कराता है,
हर कहीं मुझे नज़र आता है वो,
रिश्ता तो आप सबका भी,
होगा उसके साथ,
पर प्रभु और मेरी तो,
बात ही कुछ और है.....

सिम्मी मैनी

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