कौन कहता है कि मैं कविता लिखती हूँ,
कहाँ जानती हूँ मैं व्याकरण की बारीकियां,
और कहाँ है मुझे ? गूढ़ शब्दों का ज्ञान,
नहीं आते मुझे सजे संवरे आलंकृत शब्द,
और कहाँ पढ़े हैं मैंने वेद पुराण ?
मेरा तो दिल बस यूँही इशारा करता है हाथ को,
और हाथ झट से कलम उठा लेते हैं,
बिखर जातें हैं भावनाओं के मोती कागज़ पर,
और आप उसे कविता करार देते हैं l
कहाँ जानती हूँ मैं व्याकरण की बारीकियां,
और कहाँ है मुझे ? गूढ़ शब्दों का ज्ञान,
नहीं आते मुझे सजे संवरे आलंकृत शब्द,
और कहाँ पढ़े हैं मैंने वेद पुराण ?
मेरा तो दिल बस यूँही इशारा करता है हाथ को,
और हाथ झट से कलम उठा लेते हैं,
बिखर जातें हैं भावनाओं के मोती कागज़ पर,
और आप उसे कविता करार देते हैं l
arey ji aaj to hum aapko bhaavnaaon ka sagar aur sartaaj karaar dete hain ....aap kubool karen !!!
ReplyDeletehahaha,,,,,thanks nisha
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