बीता वक़्त
बीते वक़्त में झाँकना भी
अपने आप में एक कला है
अगर पलट कर देखना है
बीते वक़्त को
तो अदा से देखो
जान जाओगे कि
जो मेहंदी आज रंग लायी है जीवन में
उसका पिसना ज़रूरी था
जो फूल आज महकते है बगिया में
वो काँटों के बिना नहीं मिलते शायद
और गर इस भेद को समझ लिया
तो हर बीता कठिन लम्हा ही
तुम्हारे आज मुस्कुराने की
वजह बन जाएगा
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