दिल की बात
Wednesday, 4 July 2018
धूप और छांव
धूप और छांव
धूप और छांव का खेल तो
जीवन में चलता ही रहता है
साया भी कभी साथ होता है
तो कभी साथ छोड़ देता है
पर हिम्मत और
कुछ कर गुज़रने की तमन्ना
मंज़िल के क़रीब खींचती है
और क़दम रोके नहीं रुकते
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