Monday, 19 March 2012

एक हो जायेंगे ..........


एक हो जायेंगे ............

जानती हूँ
तुम यही कहीं हो 
मेरे बहुत करीब 
तुम्हारे क़दमों की आहट
का संगीत सुनती हूँ
तुम्हारी सांसों की खुशबू
पहचानती हूँ 

तुम्हारे तेज से 
आँखें चौंधिया सी जाती हैं
बुत हो जाता है शरीर
और सभी ख्याल
पल भर को सो जाते हैं
बहते हैं मोती आँखों से
और नर्म होंठ कंपकपाते  हैं

बस एक बार तुम्हे 
छूना चाहती हूँ
तुम्हारे आगोश में 
सोना  चाहती हूँ
तुम्हारी होना चाहती हूँ
उस एक पल को
 जीना चाहती हूँ
जिसके इंतज़ार में
सदियाँ गुज़ार दी
सोचती हूँ
कैसा होगा वो एक पल?
जब आत्मा और परमात्मा
एक हो जायेंगे ......

सिम्मी मैनी     

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