घर ले चलो
क्या तुम यहीं हो?
तुम्ही ने भेजा था हमें
जीवन का खेल खेलो
हम कुछ सीखे
कभी गिरे
कभी संभाले
पर तुम मुस्कुराते रहे
शायद जीवन का कोई
अनमोल पाठ पढ़ाते रहे
अब ज़रा थक से गये हैं
पिता हो तुम
फ़र्ज़ निभाओ
देर ना करो
आ भी जाओ
आ कर स्नेह का
लेप लगाओ
तुम्हारा वादा था
कलयुग के अंतिम
पड़ाव पर
जब धर्म की हानी होगी
तुम आओगे
क्या तुम्हारा
दिल नहीं खिंचता ?
बस अब आकर
घर ले चलो
कुछ दिन तुम्हारी
संगत में
अपने सही स्वरुप
को पहचाने
मैले कपडे बदलें
फिर सतयुगी दुनिया में आयेंगे
जीवन का खेल खेलने
एक नयी उर्जा के साथ
सिम्मी मैनी
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