शिकवे से शुक्राने तक का सफर
पूजा अर्चना तो हम सभी करते हैं ,,,,वो पिता है तो दिल की हर बात भी उससे होती है,,,,मुझे याद है कि अक्सर मैं उसे एक छोटा थैंक्स कह कर मन की बात को आगे बढाती थी ,,,,ऐसा क्यों होता है ? वैसा क्यों हुआ? उसने ऐसा क्यों किया? यह वक़्त पर क्यों नहीं हुआ ? ,,,,,और भी ना जाने क्या क्या ,,,,,मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था कि यह बातें शिकायत हैं ,,,,मैं तो इन्हें दिल की बात समझती थी ,,,,,,,,बस बात कहती चली जाती और लिस्ट बढ़ती चली जाती ,,,,जीवन प्रश्नों से भर गया ,,,,,,,,और जवाब देने वाला कोई नहीं ,,,,,या फिर अप्रत्यक्ष रूप में सभी जवाब मिल रहे थे ,,,पर मेरी खुद की क्षमता उन्हें देखने , सुनने, और समझने की नहीं थी ,,,,,फिर जीवन में एक मोड़ आया ,,,,मैंने सिस्टर शिवानी का कार्यक्रम आस्था चैनल पर देखा ,,,,और उस बीस मिनट के कार्यक्रम ने जीवन , आत्मा और ईश्वर के प्रति मेरे दृष्टिकोण को बदल दिया ,,,,दिन के तीन से चार घंटे यह कार्यक्रम देखना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया ,,,,,,,,अब तन की सफाई से पहले मन की सफाई नित नियम बन गया ,,,,मैंने महसूस किया की परमात्मा चाहे तो किसी यंत्र को भी जरिया बना कर आपकी मदद कर सकता है ,,,,,,,बस आपकी चाह सच्ची होनी चहिए ,,,,
परिस्थितियाँ वहीँ थी पर देखने और समझने का नज़रिया बदल चुका था ,,,,,जान चुकी थी कि बदलाव मुमकिन है ,,,,,,अब कुछ भी अप्रिय घटता तो मुख से यही निकलता " परमात्मा तेरा शुक्र है " ,,,,,
when someone criticizes me i overcome criticism
when someone insults me i overcome insult
when someone ignores me i overcome ignorance
when someone hurts me i overcome pain
when someone is jealous of me i overcome jealousy and feeling of competition
when i loose a close relation or possession i overcome attachments
when i or my idea is being rejected i overcome rejection
when i am not able to achieve,,,may be it is not the right time
ऐसे जाने कितने ही पाठ हैं जो वक़्त और परमात्मा ने पढ़ाए ,,,,,,शुक्राना सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि ऊर्जा है जो ब्रह्मांड में वेग से बहती है ,,,पिता से कहती है शुक्रिया तुमने जो भी दिया , जब भी दिया ,,,,तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता संतान को कब , क्या और कितना देना है ,,,,,,,,,
इसी शुक्राने का जादू जीवन में फ़ैल गया और " रब्बा तेरा शुक्राना " भजन बन गया ,,,,,,,,,,,,,,
पूजा अर्चना तो हम सभी करते हैं ,,,,वो पिता है तो दिल की हर बात भी उससे होती है,,,,मुझे याद है कि अक्सर मैं उसे एक छोटा थैंक्स कह कर मन की बात को आगे बढाती थी ,,,,ऐसा क्यों होता है ? वैसा क्यों हुआ? उसने ऐसा क्यों किया? यह वक़्त पर क्यों नहीं हुआ ? ,,,,,और भी ना जाने क्या क्या ,,,,,मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था कि यह बातें शिकायत हैं ,,,,मैं तो इन्हें दिल की बात समझती थी ,,,,,,,,बस बात कहती चली जाती और लिस्ट बढ़ती चली जाती ,,,,जीवन प्रश्नों से भर गया ,,,,,,,,और जवाब देने वाला कोई नहीं ,,,,,या फिर अप्रत्यक्ष रूप में सभी जवाब मिल रहे थे ,,,पर मेरी खुद की क्षमता उन्हें देखने , सुनने, और समझने की नहीं थी ,,,,,फिर जीवन में एक मोड़ आया ,,,,मैंने सिस्टर शिवानी का कार्यक्रम आस्था चैनल पर देखा ,,,,और उस बीस मिनट के कार्यक्रम ने जीवन , आत्मा और ईश्वर के प्रति मेरे दृष्टिकोण को बदल दिया ,,,,दिन के तीन से चार घंटे यह कार्यक्रम देखना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया ,,,,,,,,अब तन की सफाई से पहले मन की सफाई नित नियम बन गया ,,,,मैंने महसूस किया की परमात्मा चाहे तो किसी यंत्र को भी जरिया बना कर आपकी मदद कर सकता है ,,,,,,,बस आपकी चाह सच्ची होनी चहिए ,,,,
परिस्थितियाँ वहीँ थी पर देखने और समझने का नज़रिया बदल चुका था ,,,,,जान चुकी थी कि बदलाव मुमकिन है ,,,,,,अब कुछ भी अप्रिय घटता तो मुख से यही निकलता " परमात्मा तेरा शुक्र है " ,,,,,
when someone criticizes me i overcome criticism
when someone insults me i overcome insult
when someone ignores me i overcome ignorance
when someone hurts me i overcome pain
when someone is jealous of me i overcome jealousy and feeling of competition
when i loose a close relation or possession i overcome attachments
when i or my idea is being rejected i overcome rejection
when i am not able to achieve,,,may be it is not the right time
ऐसे जाने कितने ही पाठ हैं जो वक़्त और परमात्मा ने पढ़ाए ,,,,,,शुक्राना सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि ऊर्जा है जो ब्रह्मांड में वेग से बहती है ,,,पिता से कहती है शुक्रिया तुमने जो भी दिया , जब भी दिया ,,,,तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता संतान को कब , क्या और कितना देना है ,,,,,,,,,
इसी शुक्राने का जादू जीवन में फ़ैल गया और " रब्बा तेरा शुक्राना " भजन बन गया ,,,,,,,,,,,,,,
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