Sunday, 13 July 2014

                     
                                                               सपने

अक्सर आस पास सुनने को मिलता है ,,,अब हमारा क्या है ? ,,,,हमारा वक़्त बीत गया ,,,,अब तो बच्चे ही कुछ करेंगें ,,,,my son or daughter is living my dream ,,,,,पर क्या यह सच है ? क्या हमारी संतान हमारे सपनो को पूरा करेगी ? क्या यह सोचना जायज़ है ? मुझे लगता है जब हम अपने सपनो की ज़िम्मेदारी खुद नहीं ले पाते तो अपने सपनो का बोझ अपने बच्चों पर लाद देते हैं बिना यह विचार किये कि बच्चों की अपनी ख़्वाहिशें हैं अपने ख़्वाब हैं ,,,,या फिर हम अपने सपने को खुद ही नहीं पहचान पाते ,,,,,,,,,क्या हम जानते हैं हम किस काम की लिए बने हैं?  ,,,,किस काम में बेस्ट हैं  ? ,,,या फिर रोज़ी रोटी और लोकचारी  हमारे काम को तय  करती है ? ,,,क्या हम अपने सपने का सम्मान करते हैं ? अगर हाँ ,,,,तो दुनियाँ  की कोई ताकत उसे पूरा होने से नहीं रोक सकती ,,,,,अपने सपनो से कभी समझौता मत करो ,,,,यह सपने ही हैं जो कभी हकीकत बात जाते हैं ,,,,,,


एक दिन मैंने भी एक ख़्वाब देखा ,,,,,,रास्ता मुश्किल था ,,,,कोई short cut नहीं था ,,,पर मंज़िल तय थी ,,,,सपना शिक्षा का ,,,,शिक्षा सिर्फ किताबों को रट लेना नहीं है बल्कि जीवन में हर हालत में आगे बढ़ना है ,,,,आप जिस भी काम में अच्छे हैं उसमें महारत हासिल करना है ,,,,,,मुझे याद है मैंने जब संगीत सीखना शुरू किया तो घर में कई बार सब मज़ाक भी उड़ाते थे ,,,,पर मुझ पर वो शब्द कभी हावी नहीं हुए ,,,,सपने की शील्ड होती ही इतनी मज़बूत है ,,,,सपनो के  मैदान में में दौड़ तो नहीं पायी पर कदम कभी रुके नहीं ,,,,बस चलती रही ,,,,कई बार कई बार सब पूछते  " यह जो सब सीख रही हो बरसों से ,,करना क्या चाहती हो ? " अंतर से हर बार आवाज़ आती मैं  अपना सपना पूरा कर रही हूँ ,,,मैं  इसी के लिए बनी   हूँ ,,,,,RESPECT YOUR DREAMS,,,,,,DARE TO DREAM ,,,,,अपनी एक रचना आप सब के साथ बाँट रही हूँ ,,,,,

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