हाथ किसने छोड़ा था?
यह जो हलके से
मेरी ऊँगली थामे है,
यह कौन है?
तुम हो या मेरा साया
जिसके स्पर्श मात्र
के एहसास से
चन्दन सी महक
उठती है काया
सोचती हूँ
यह कौन है?
तुम हो या मेरा साया
मेरी उंगली थामे तुम
मेरी परछाई बन जाते हो
काँटों भरी राह देख
अभिभावक की तरह
हर कठिनाई पार कराते हो
वाकिफ हो जीवन के हर सच से
तभी तो मंजिल तक पहुचाने का
पूरा भार उठाते हो
मैं ही भटक जाती हूँ राह
और तुम्हारा हाथ छोड़
भागती हूँ एक अनजानी दौड़ में
जब थक जाती हूँ तो
निगाहें ढूँढती हैं तुम्हे
अरे !तुम तो पास ही खड़े हो
अब तुम अपना हाथ
मेरी और बढ़ाते हो
मैं थाम लेती हूँ हाथ तुम्हारा
और डर से मुक्त हो जाते हूँ
एक अजीब सुकून मिलता है मुझे
टकटकी लगाये देखती हूँ तुम्हे
कभी शिकायत करती हूँ
तो कभी नाराज़ होती हूँ
पर तुम विचलित नहीं होते
मंद मंद मुस्कुराते हो
और हलके से कहते हो
हाथ किसने छोड़ा था?
जब तुम्हारी आस्था
डगमगाती है मुझ पर
तो तुम ही छोड़ देती हो मेरा साथ
भरोसा रखो मुझ पर
और देखो-
मैं हूँ सदा तुम्हारे साथ
सिम्मी मैनी
यह जो हलके से
मेरी ऊँगली थामे है,
यह कौन है?
तुम हो या मेरा सायाजिसके स्पर्श मात्र
के एहसास से
चन्दन सी महक
उठती है काया
सोचती हूँ
यह कौन है?
तुम हो या मेरा साया
मेरी उंगली थामे तुम
मेरी परछाई बन जाते हो
काँटों भरी राह देख
अभिभावक की तरह
हर कठिनाई पार कराते हो
वाकिफ हो जीवन के हर सच से
तभी तो मंजिल तक पहुचाने का
पूरा भार उठाते हो
मैं ही भटक जाती हूँ राह
और तुम्हारा हाथ छोड़
भागती हूँ एक अनजानी दौड़ में
जब थक जाती हूँ तो
निगाहें ढूँढती हैं तुम्हे
अरे !तुम तो पास ही खड़े हो
अब तुम अपना हाथ
मेरी और बढ़ाते हो
मैं थाम लेती हूँ हाथ तुम्हारा
और डर से मुक्त हो जाते हूँ
एक अजीब सुकून मिलता है मुझे
टकटकी लगाये देखती हूँ तुम्हे
कभी शिकायत करती हूँ
तो कभी नाराज़ होती हूँ
पर तुम विचलित नहीं होते
मंद मंद मुस्कुराते हो
और हलके से कहते हो
हाथ किसने छोड़ा था?
जब तुम्हारी आस्था
डगमगाती है मुझ पर
तो तुम ही छोड़ देती हो मेरा साथ
भरोसा रखो मुझ पर
और देखो-
मैं हूँ सदा तुम्हारे साथ
सिम्मी मैनी
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