Saturday, 3 December 2011

बस इतना चाहती हूँ .....

                बस इतना चाहती हूँ


बाँट सकूँ  तो बाँटू  खुशियाँ

जुटा   सकूँ तो  जुटाऊं  लोग

कमा सकूँ तो कमाऊँ प्रेम

माँग सकूँ तो माँगूं  दुआ


दे सकूँ तो दूँ अपनापन


छोड़ सकूँ तो छोडूँ  ईर्ष्या

घटा सकूँ तो घटाऊँ द्वेष

समां   सकूँ तो  समां लूँ  नफरत


पी सकूँ तो पी लूँ क्रोध


हँस सकूँ तो हँस लूँ  खुद  पर


सीख सकूँ  तो सीखूँ  जीना


और क्या कहूँ  मैं तुमसे प्रभु


मैं तो बस इतना चाहती हूँ


सिम्मी मैनी






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