Friday, 23 December 2011

खुद की दोस्त .....

            खुद की दोस्त 

मैं खुद की दोस्त हूँ
सबसे पक्की ,सबसे सच्ची
मैं खुद ही गिरी
और खुद ही
उठ खड़ी हुई


खुद ही बिखरी
और खुद ही जुड़ गई
सिर्फ एक मैं हूँ
जिसने खुद को कभी
हैरत भरी नज़रों से नहीं देखा
चोट लगी कभी
तो खुद ही संभल गयी
खुद को पुचकारा
और खुद ही अपने
घाव पर मरहम लगाया
खुद ही ढूंढी राह
और उस पर बढ चली




खुद ही अपनी गलतियों
से सीख ली और
खुद ही अपनी उपलब्धिओं पर
अपनी पीठ थपथपाई
खुद ही गिरते पड़ते जीवन के
कई पाठ सीख गयी




कभी कुछ नहीं
छिपाया खुद से
और सदा समय पड़ने पर
अपना साथ दिया
कभी कोई प्रशनचिंह
नहीं लगाया अपने अस्तित्व पर
और सदा खुद को मान दिया




खुद से सदा प्रेरणा ली
एक बेहतर इन्सान बनने की
खुद की कमियों को स्वीकार
और खुद की खूबियों को
निखारा खुद ही


घंटो बात की खुद से
समय पड़ने पर
और खुद ही ढूँढ निकाले
उन सब प्रश्नों के उत्तर
जिनके लिए लोग अक्सर
दूसरों का सहारा
ढूँढा करते हैं
क्योंकि
मैं खुद की दोस्त हूँ
सबसे पक्की ,सबसे सच्ची


सिम्मी मदन  मैनी







2 comments:

  1. Beautiful thoughts ...!!

    जिसे खुद से मिलना हुज़ूर आ गया
    उसे जिंदगी का शऊर आ गया...!

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  2. shukriya is haunsalafazi ke liye nisha ji

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