Thursday, 24 May 2012

दाग ,,,,,,,,,



    दाग 

चांदनी तो तुम्हारी
कहलाती  है सदा
और मान भी पाती है,,,,,
पर,,,,,,,,,,,,,
ऐ चाँद !!!!!
मैं तुम्हारे 
चेहरे का 
वो दाग हूँ
जो खुद 
बदनाम होकर 
तुम्हे बुरी नज़र से 
बचाता है,,,,,,,,
और यही प्यार है,,,,,
हाँ!!!!!!!!!!!!
यही प्यार है,,,,,
और 
हर प्यार करने वाले को
अपनी मंजिल मिले 
ये ज़रूरी तो नहीं,,,,

सिमी मैनी 

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