Tuesday, 22 May 2012

वजूद .....





     वजूद 

लोग तो यूँ ही
आसमान को छूने 
के लिए इतनी 
जद्दो जहेद करते हैं
मैंने तो पहले से ही
अपने ख्वाबों और ख्वाहिशों को
आसमान में टांका है
ये जो ज़री वाला आसमान 
चमकता है ना,,,,
दरअसल ,,,
मेरा वजूद है

ये समेटे है
मेरी हर इच्छा 
और आशा को
जो रोज़ रात
टिमटिमाती है
और अपने होने का 
एहसास दिलाती है

आत्मा जो चाँद सी 
चमकती है
करती है पहरेदारी
मेरे सपनों की
डरती है ,,,
कहीं थक कर
मेरी कोई खवाहिश 
सो ना जाये,,,

क्या आपका वजूद भी
इस विस्तृत गगन सा
विशाल है?
जो,,,,,,
परिस्तिथियों के 
गरजते बादलों
और दर्द की कड़कती 
बिजली से भी
विचलित नहीं होता 
और उम्मीद के 
हर तारे को 
सहेज कर
रखता है

सिम्मी मैनी 

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