आज के उन्वान **** ज़िन्दगी / जीवन **** पर मेरी एक रचना " ज़िन्दगी " पेश है ,,,,,,
क्या तुम बता सकते हो?
कि,,,,
और,,,,
तुम्हारी ज़िन्दगी उससे
अलग क्यों है?
किसी की ज़िन्दगी है रंगीन
तो किसी की हसीन
किसी की है बेरंग
किसी की मस्त मलंग
किसी की है दर्द
तो किसी की सुकून
किसी की है उल्फत
तो किसी की जूनून
रब से तो
मिला था सबको
एक सुन्दर शरीर
और सोच का
खूबसूरत केनवस
हम ही ने
अपने विचारों के
ब्रश को,,,,
संस्कारों के रंगों
में डुबो कर,,,,
अपने अनुभव से
जो चित्र
उस केनवस पर बनाये
बस वही ज़िन्दगी बन गए
और हम सबकी
ज़िन्दगी की परिभाषा
एक दूसरे से
अलग हो गयीं
सिम्मी मदन मैनी

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