स्त्री
मैं स्त्री
त्याग के कोयले में
तुम्हारे जीवन की
सिलवटें निकालती
एक इस्त्री की तरह
तुम्हारा जीवन तो
संवर गया
मेरे सपनों के
जलने से
और कायदे से
जिंदगी की
अलमारी में
सज भी गया
पर एक बात जान लो
अगर मैंने खुद तप कर
तुम्हे नहीं संवारा तो
तुम्हारे मुचड़े
अस्तित्व की गठड़ी
यहीं कहीं पड़ी
नज़र आएगी
घर के किसी कोने में
सिम्मी मैनी

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