जीत का परचम...............
चल उठ फिर से
कि दौड़ में फिसलने वाले
हारा नहीं करते
तू ही है- जो इस तूफ़ान का सामना कर सके
तू ही है- जो समेट सके टूटे सपनो के टुकड़ों को
तू ही है- जो अँधेरे में दीप जला सके
तू ही है- जो धारा के विपरीत दिशा में बह सके
तू ही है- जो झेल सके कुदरत के शूल
तू ही है- सह जाये दूसरों की नज़रों के गहरे तीर
और फिर भी स्थिर रहे
तू ही है- जो संभाल सके जीवन का भार
तू ही है- जो बनी है कईयों के जीवन का आधार
तू ही है- जो लड़ सकती है हर कठिनाई से
तू ही है- जो न सुख में उछ्लेगी और न दुःख में डोलेगी
तू ही है- लक्ष्मी, सरस्वती , और दुर्गा
ज़रा झांक खुद में
और अपनी ताकत को पहचान
डर मत, अभी यह तेज़ हवाओं का शोर है
जो थम जाएगा ,तेरे उठते ही
चल उठ... खड़ी हो जा
कि कमज़ोर हैं
वक़्त कि यह हवाएं तेरे सामने
देखना तुझ से टकराकर लौट जाएँगी
और छोड़ जाएँगी एक असीम शांति
जो एहसास कराएगी तुझे
कि तुझसा हिम्मतवाला
दूसरा और कोई नहीं
और देखना तू ही लहराएगी
जीत का परचम...............
सिम्मी मदन मैनी
चल उठ फिर से
कि दौड़ में फिसलने वाले
हारा नहीं करते
तू ही है- जो इस तूफ़ान का सामना कर सके
तू ही है- जो समेट सके टूटे सपनो के टुकड़ों को
तू ही है- जो अँधेरे में दीप जला सके
तू ही है- जो धारा के विपरीत दिशा में बह सकेतू ही है- जो झेल सके कुदरत के शूल
तू ही है- सह जाये दूसरों की नज़रों के गहरे तीर
और फिर भी स्थिर रहे
तू ही है- जो संभाल सके जीवन का भार
तू ही है- जो बनी है कईयों के जीवन का आधार
तू ही है- जो लड़ सकती है हर कठिनाई से
तू ही है- जो न सुख में उछ्लेगी और न दुःख में डोलेगी
तू ही है- लक्ष्मी, सरस्वती , और दुर्गा
ज़रा झांक खुद में
और अपनी ताकत को पहचान
डर मत, अभी यह तेज़ हवाओं का शोर है
जो थम जाएगा ,तेरे उठते ही
चल उठ... खड़ी हो जा
कि कमज़ोर हैं
वक़्त कि यह हवाएं तेरे सामने
देखना तुझ से टकराकर लौट जाएँगी
और छोड़ जाएँगी एक असीम शांति
जो एहसास कराएगी तुझे
कि तुझसा हिम्मतवाला
दूसरा और कोई नहीं
और देखना तू ही लहराएगी
जीत का परचम...............
सिम्मी मदन मैनी












