Wednesday, 28 March 2012
Thursday, 22 March 2012
अग्नि परीक्षा ....
अग्नि परीक्षा
सिम्मी मदन मैनी
माते क्यों दी अग्नि परीक्षा
यह तुमने क्या कर डाला?
दुष्ट ,फरेबी .चरित्रहीन भी
अब लगे जलाने ज्वाला
कूदो इसमें
दो अग्नि परीक्षा
जिससे सीता ना बच पायी
इस युग की नारी के
जीवन में माँ यह
कैसे आग लगायी
राम नहीं अब
इस दुनिया में
पर सीता बहुत मिले हैं
हर नुक्कड़
हर गली , चौराहे
एक सीता
रोज़ जले है
Wednesday, 21 March 2012
Tuesday, 20 March 2012
मायका .....
मायका
हाथ में बोरिया बिस्तर उठाये
आत्मसम्मान की खातिर
दिल टूट चुका था और
दिमाग ने काम करना
बंद कर दिया था
काली गहरी रात में
सोच रही थी
किस और जाऊं ?
तभी कई घरों के समूह में
एक अपना सा घर
नज़र आया ...
और खिड़की से झांकते
कई परिचित चेहरों ने
मुझे सहारा दिया
दरवाज़े पर
आरती की थाली लिए खड़ी
मेरी माँ थी ....
बुला रही थी उसकी
प्यार भरी निगाहें
मुझे अपनी ओर
पर यह क्या????
मेरा सामान देखते ही
माँ के मुख से
आरती की जगह
गालियाँ बरसने लगीं
सभी खिड़कियाँ
बंद हो गयीं
ओर बाबा के
आशीर्वाद देने वाले हाथों ने
मुझे बहार का
रास्ता दिखाया
मैं टूटी से
भारी क़दमों से
वापिस चल पड़ी
तभी पीछे से आवाज़ आई
कभी सोचा है ?
कि लोग क्या कहेंगे?
में सोच रही थी
कि काश आप सुन पाते
आपकी बेटी क्या कहना चाहती है?
ओर मेरा मायका
पराया हो गया............
सिम्मी मदन मैनी
Monday, 19 March 2012
घर ले चलो .......
घर ले चलो
क्या तुम यहीं हो?
और कहा था...जाओ
जीवन का खेल खेलो
हम कुछ सीखे
कभी गिरे
कभी संभाले
पर तुम मुस्कुराते रहे
शायद जीवन का कोई
अनमोल पाठ पढ़ाते रहे
अब ज़रा थक से गये हैं
पिता हो तुम
फ़र्ज़ निभाओ
देर ना करो
आ भी जाओ
आ कर स्नेह का
लेप लगाओ
तुम्हारा वादा था
कलयुग के अंतिम
पड़ाव पर
जब धर्म की हानी होगी
तुम आओगे
क्या तुम्हारा
दिल नहीं खिंचता ?
बस अब आकर
घर ले चलो
कुछ दिन तुम्हारी
संगत में
अपने सही स्वरुप
को पहचाने
मैले कपडे बदलें
फिर सतयुगी दुनिया में आयेंगे
जीवन का खेल खेलने
एक नयी उर्जा के साथ
सिम्मी मैनी
एक हो जायेंगे ..........
एक हो जायेंगे ............
तुम यही कहीं हो
तुम्हारे क़दमों की आहट
का संगीत सुनती हूँ
तुम्हारी सांसों की खुशबू
पहचानती हूँ
तुम्हारे तेज से
आँखें चौंधिया सी जाती हैं
बुत हो जाता है शरीर
और सभी ख्याल
पल भर को सो जाते हैं
बहते हैं मोती आँखों से
और नर्म होंठ कंपकपाते हैं
बस एक बार तुम्हे
छूना चाहती हूँ
तुम्हारे आगोश में
सोना चाहती हूँ
तुम्हारी होना चाहती हूँ
उस एक पल को
जीना चाहती हूँ
जिसके इंतज़ार में
सदियाँ गुज़ार दी
सोचती हूँ
कैसा होगा वो एक पल?
जब आत्मा और परमात्मा
एक हो जायेंगे ......
सिम्मी मैनी
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