Monday, 7 February 2022

साथी या बैसाखी

                साथी या बैसाखी 


प्रियतम आज तुमसे जुड़ जाऊंगी मैं 

पर सिर्फ इतना चाहती हूँ कि 

तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं 


प्रेम तो करना मुझसे 

पर बांध मत लेना खुद से 

क्योंकि   कैद में पंछी  रोते  हैं गाते  नहीं 

कैसा   भी दाना  डालो 

आज़ादी की प्यास  मन से जाती नहीं 

प्रियतम  तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं 


दिन रात निहारना मुझे 

और इस क्षणभंगुर शरीर के भीतर 

मुझ तक पहुँच जाना 

गुफ़्तगू  करना मेरे सपनो से 

और दोस्ती का रिश्ता निभाना 

मालिक और गुलाम की बात

 मुझे रास  आती नहीं 

प्रियतम  तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं 


इठलाऊँगी मैं भी 

जब एक फूल की तरह 

नज़ाकत से संभालोगे मुझे 

पर ध्यान रहे 

फूल की खुशबू  हर दिल तक पहुँचती है 

सिर्फ माली को आती नहीं 

प्रियतम  तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं 


No comments:

Post a Comment