साथी या बैसाखी
प्रियतम आज तुमसे जुड़ जाऊंगी मैं
पर सिर्फ इतना चाहती हूँ कि
तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं
प्रेम तो करना मुझसे
पर बांध मत लेना खुद से
क्योंकि कैद में पंछी रोते हैं गाते नहीं
कैसा भी दाना डालो
आज़ादी की प्यास मन से जाती नहीं
प्रियतम तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं
दिन रात निहारना मुझे
और इस क्षणभंगुर शरीर के भीतर
मुझ तक पहुँच जाना
गुफ़्तगू करना मेरे सपनो से
और दोस्ती का रिश्ता निभाना
मालिक और गुलाम की बात
मुझे रास आती नहीं
प्रियतम तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं
इठलाऊँगी मैं भी
जब एक फूल की तरह
नज़ाकत से संभालोगे मुझे
पर ध्यान रहे
फूल की खुशबू हर दिल तक पहुँचती है
सिर्फ माली को आती नहीं
प्रियतम तुम मेरे साथी बनना बैसाखी नहीं
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