Wednesday, 4 July 2018

बेड़ियाँ या फिर पंख

बेड़ियाँ या फिर पंख

आप अपनी बेटी को 
पाँव में अलता लगा कर 
झाँझर पहनाएँ
और पिया के घर भेजें

या फिर स्कूल के जूते पहनाकर
सुखद भविष्य की और क़दम बढ़ाने दें
पसंद आप ही की है
और फ़ैसला भी आप का

पर किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले
अपने दिल से पूछ लें कि
आप आपके कलेजे के टुकड़े को
तोहफ़े में क्या पसंद आएगा ?
बेड़ियाँ ... जो उसके अस्तित्व को
पनपने से रोक दें
या फिर
पंख... जो उसकी उड़ान को
एक मुक़ाम तक ले जाएँ 

नज़र और नज़रिया

नज़र और नज़रिया

आँखों देखी हर बार सच हो यह ज़रूरी नहीं 
यह तुम्हारी आँखों का भ्रम भी हो सकता है 
नज़र हर ख़ूबसूरत चीज़ को चाहती है 
पर नज़रिया हर चीज़ को ख़ूबसूरत बनाता है 

बीता वक़्त


बीता वक़्त 

बीते वक़्त में झाँकना भी
 अपने आप में एक कला है 
अगर पलट कर देखना है 
बीते वक़्त को 
तो अदा से देखो
जान जाओगे कि
जो मेहंदी आज रंग लायी है जीवन में
उसका पिसना ज़रूरी था
जो फूल आज महकते है बगिया में
वो काँटों के बिना नहीं मिलते शायद
और गर इस भेद को समझ लिया
तो हर बीता कठिन लम्हा ही
तुम्हारे आज मुस्कुराने की
वजह बन जाएगा 

जीवन यात्रा का घड़ा

जीवन यात्रा का घड़ा 


जीवन यात्रा का घड़ा 
हम सब 
अपनी सोच के मुताबिक़ उठाती  हैं 

कोई सिर  माथे लेती है जीवन की चुनौतियों  को
और ईश्वर का वरदान समझ कर ग्रहण करती है

कोई जिम्मेदारी समझ  कर काँधे पर संभालती  हैं
और अंत तक इसका साथ निभाती है 

तो कोई
इस यात्रा में आने वाली चुनौतियों  को 
एक बच्चे की तरह बाहों में भरती है
और प्यार से सँवार कर
उनसे पार पा लेती है

हम सबका नज़रिया ही हमें
एक दूसरे से ना सिर्फ़
एक होते हुए अलग बनाता  है
बल्कि
अलग अलग रास्तों से
अपनी मंज़िल तक पहुँचाता है

Tuesday, 3 July 2018

परछाई

परछाई

आस -पास  नज़र आती हर औरत
मेरी ही परछाई है
कुछ तो है
जो एक -सा है हममें


आँखों की प्यास वही है
दिल में  धड़कते जज़्बात वही हैं
टूट कर बिखरना
और बिखर कर जुड़ना वही है


रिश्तों की डोरियाँ एक-सी
जीने का एहसास वही है
माँ की ममता वही
और बहन का प्यार वही है


बेटी की शरारत एक-सी
पत्नी का श्रृंगार वही है
फिर अपनी ही परछाई से
ईर्ष्या और नफरत कैसी


बस कहने की बात है कि
अंधेरे में साया भी साथ छोड़ देता है
साया तो मुझ में ही क़ैद होता है
देर तो अंधेरे से उजाले में
जाने भर की है


आओ दूर करें
इस जलन के अंधेरे को
सब मिल कर चमक उठें
और जान लें कि
एक दूसरे को उठाने में
कैसा आनंद है












Tuesday, 20 June 2017

घरौंदा विपिन उर्वशी का

   घरौंदा विपिन उर्वशी का

मकान तो सब बना लेते हैं
या फिर विरासत में पा लेते हैं
पर घर तो किसी
किस्मत वाले का बनता है
घर की नीँव धन से नहीं
मन से बनती है
और आज ऐसे ही एक घर में
आप सबका स्वागत है
यह भवन सीमेंट के स्तंभों पर नहीं
टिका है उर्वशी और विपिन की उम्मीदों पर
गौर से देखिए यह ऊँची दीवारें
जो बनी  हैं साहिबा और साहिल के सपनों से
इन दीवारों की सिचाईं में खपा है
ढेर सारा खून पसीना
कड़ी मेहनत की खुशबू
इस घर के हर कोने से आती है
आनंद की रंगोली से सजा है प्रवेश द्धार
और प्रेम का वंदनवार उसकी शान बढ़ाता है
इस घर में आने वाला हर मेहमान
सम्मान और आदर सत्कार का स्वाद चखता है
ये संगमरमरी फर्श जोड़ता है
घर के हर सदस्य को उसकी मिट्टी  से 
और अर्श को छूती  छत पर
चमकते हैं भविष्य के सुनहरे सपने
बड़ी खिड़कियों से बह कर आती हैं 
ढेर सारी दुआएं और शुभ कामनाएं
रसोईघर में पवित्रता का प्रसाद पकता है
जो आत्मा को शान्ति  से भर देता है
इस घर पर ईश्वर की रेहमत बरसती है
और सर्वगुणों का इन्द्रधनुष
इस घर की छठा में चार चाँद लगता है
भला कौन ऐसे घर में नहीं आना चाहेगा
जिसमें पाँव रखते ही
किसी मंदिर में
प्रवेश करने का एहसास हो
मेरी दिल से दुआ है कि
आप दिन दुगनी और रात चौगुनी तरक्की करें
आपके खवाब सदा ऊंचे
और पैर ज़मीन पर रहें
आपको यहाँ वो सब खुशियाँ नसीब हों
जिनकी कभी आपने आरज़ू की थी
और
आपका यह घरौंदा सदा चेहकता रहे

सिम्मी मदन मैनी 










Monday, 1 May 2017

बेबी बुआ

     बेबी बुआ
 खोज में हैं नज़रें
किसी ऐसी शै को
जो आपके सजदे में रख सकूँ
पर इस पूरी कायनात में
कोई ऐसी चीज़ कहाँ
जो आपकी बराबरी कर सके
तो क्यों ना तोहफे में
अपने दिल के जज़्बात बयां करूँ

भाभी ,बाउजी ने
अपने घर की देहलीज़ पर
सात दिए जलाए
पर उनमें रोशनी की किरण
तब फूटी
जब बेबी बुआ घर में आई
सब भाईयों की लाड़ली
और भाभी ,बाउजी के दिल की धड़कन
छोटी बेबी को खुदा ने
शिक्षा ,संवेदना ,सहनशीलता
और तन ,मन की ख़ूबसूरती से नवाज़ा

परी  सी  बेबी बुआ जब
एक अनजान सफर पर निकली
तो परिस्थितियों की कड़ी धूप से
अनजान थी
पर हिम्मत और शुभ संस्कारों की विरासत
उनका रास्ता आसान करती चली गई


आपने न सिर्फ अपने घर में
बल्कि दूसरों के दिलों में भी
प्रेम और शिक्षा के ऐसे दिए जलाए
की हर ज़र्रा आप पर फ़िदा हो गया
और ईश्वर ने
 आपकी  तकलीफ के  हर कॉँटे को
उपलब्धी के फूल में तबदील कर दिया

आज हम सब की ओर  से
बस यही दुआ है कि
परमात्मा आपकी हर मनोकामना पूरी करे
और गर्म हवा का झोंका
कभी आपको ना छूने पाए
पूरे परिवार की छाया आपके सर पर बनी  रहे
और आप हर वर्ष यूँ ही हँसते खेलते
अपना जन्म  दिल मनाती  रहे 

सिम्मी मदन मैनी