वक़्त
किस धुन में भाग रहे हो ?इतनी तेज़ रफ़्तार से
तुम्हारा हर कदम
एहसास दिलाता है कि
तुम कितने बलवान हो
सभी वायदों , कसमों
रिश्तों और सोच से बड़ा है
तुम्हारा अस्तित्व
पल भर में
आसमान की
बुलंदियों पर पहुँचा देते हो
और पल में
स्वर्ग को शमशान बना देते हो
तुम चाहो तो
ताश के पत्तों की तरह
ढेह जाता है अभिमान पल में
तुम मेहरबान होते हो तो
कबीर जैसा फ़क़ीर भी
दिलों की बादशाहियत पता है
और ,,,,,
रावण जैसा बलवान भी
खाक में मिल जाता है
क्षण भर में दिलों की दरार को
खाई बना देते हो
और चाहो तो
नफरत की बंजर ज़मीन पर
प्यार के फूल खिला देते हो
कौन सिखाता है तुम्हे यह सब ?
और,,,,
कहाँ से आती है इतनी शक्ति तुममें ?
मुझे तो लगता है कि
तुम परमात्मा के
सबसे करीब हो
तभी तो कर्मानुसार
किसके साथ कब , क्या , क्यों करना है ?
इस बात की पूरी
खबर है तुम्हे ,,,
सिमी मदन मैनी
No comments:
Post a Comment