नमस्कार ,,,,
कल मेरा जन्मदिन था ,,,,हर बार की तरह एक खास दिन ,,,जिस पर वैचारिक मंथन करना ज़रूरी है ,,,कल मन में उपजे कुछ भाव आपके साथ बाँट रही हूँ ,,,,,,,,,,,,,,
जीवन ग्रन्थ
एक दिन तुम्ही ने भेजा था
जाओ अपना जीवन ग्रन्थ लिखो
हाथ में थमाई थी कलम संस्कारों की
और बुद्धि की स्याही से डुबो कर
जीवन के एक खाली पृष्ठ को भरना था
कल इस जीवन ग्रन्थ का
एक और अधूरा पन्ना पूरा हुआ
अब तक के 46 पन्नों में
समाये है जाने
कितने अनुभव ,ख़ुशी और गम
कितनी उपलब्धियाँ और गलतियाँ
आते जाते रिश्ते और बनते बिगड़ते काम
कौन जाने ? कितने पन्ने जुड़ने बाकी है
इस जीवन ग्रन्थ में
बहुत मुमकिन है कि
आज का यह संकल्प
इस जीवन ग्रन्थ पर लिखा
आखरी संकल्प हो
अब तक जो लिख डाला
उस पर तो कोई ज़ोर नहीं
पर आगे जो लिखना है
वो मेरे बस में है
आज से अपने मन से वादा है कि
उसमें उपजा हर संकल्प शुद्ध होगा
जो मेरे जीवन ग्रन्थ को
सुन्दर बना देगा
और
हर कर्म परमात्मा को समर्पित होगा
यह एक जीवन ग्रन्थ नहीं बल्कि
एक बैलेंस शीट है
जो लिखी है
अपने ही हाथों
पूरी ईमानदारी से
और इस लाभ हानि के खाते की
चैकिंग करने वाला
और कोई नहीं
परमात्मा है ,,,
सो इन्साफ भी सच्चा होगा
सोचती हूँ क्यों ना ?
वक़्त रहते अपनी कमज़ोरियाँ
सुधार लूँ
ताकि सही समय आने पर
अपने ही हाथों से
यह बही खाता बड़ी शान से
प्रभु को सौंप दूँ
इस उम्मीद के साथ कि
परिणाम अच्छा ही होगा
क्योंकी ,,,,,,,,,
मैंने इस ग्रन्थ का हर लफ्ज़
पूरी अटेंशन के साथ लिखा है
सिमी मदन मैनी
10/11/2014
कल मेरा जन्मदिन था ,,,,हर बार की तरह एक खास दिन ,,,जिस पर वैचारिक मंथन करना ज़रूरी है ,,,कल मन में उपजे कुछ भाव आपके साथ बाँट रही हूँ ,,,,,,,,,,,,,,
जीवन ग्रन्थ
एक दिन तुम्ही ने भेजा था
जाओ अपना जीवन ग्रन्थ लिखो
हाथ में थमाई थी कलम संस्कारों की
और बुद्धि की स्याही से डुबो कर
जीवन के एक खाली पृष्ठ को भरना था
कल इस जीवन ग्रन्थ का
एक और अधूरा पन्ना पूरा हुआ
अब तक के 46 पन्नों में
समाये है जाने
कितने अनुभव ,ख़ुशी और गम
कितनी उपलब्धियाँ और गलतियाँ
आते जाते रिश्ते और बनते बिगड़ते काम
कौन जाने ? कितने पन्ने जुड़ने बाकी है
इस जीवन ग्रन्थ में
बहुत मुमकिन है कि
आज का यह संकल्प
इस जीवन ग्रन्थ पर लिखा
आखरी संकल्प हो
अब तक जो लिख डाला
उस पर तो कोई ज़ोर नहीं
पर आगे जो लिखना है
वो मेरे बस में है
आज से अपने मन से वादा है कि
उसमें उपजा हर संकल्प शुद्ध होगा
जो मेरे जीवन ग्रन्थ को
सुन्दर बना देगा
और
हर कर्म परमात्मा को समर्पित होगा
यह एक जीवन ग्रन्थ नहीं बल्कि
एक बैलेंस शीट है
जो लिखी है
अपने ही हाथों
पूरी ईमानदारी से
और इस लाभ हानि के खाते की
चैकिंग करने वाला
और कोई नहीं
परमात्मा है ,,,
सो इन्साफ भी सच्चा होगा
सोचती हूँ क्यों ना ?
वक़्त रहते अपनी कमज़ोरियाँ
सुधार लूँ
ताकि सही समय आने पर
अपने ही हाथों से
यह बही खाता बड़ी शान से
प्रभु को सौंप दूँ
इस उम्मीद के साथ कि
परिणाम अच्छा ही होगा
क्योंकी ,,,,,,,,,
मैंने इस ग्रन्थ का हर लफ्ज़
पूरी अटेंशन के साथ लिखा है
सिमी मदन मैनी
10/11/2014
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