नमस्कार ,,,,
मूसा वी ,ईसा वी , नानक वी , राम वी
जिदी गोदी विच खेड़े नवी ते इमाम वी
ऐसी का एक नारी की महिमा कि जिसकी गोद में देवी देवता भी खेले ,,,,,नारी इंसानियत की जन्मदाता है ,,,,फक्र होता है स्वयं पर कि मैं इस बार एक नारी के रूप में जन्मी ,,,,पर नारी होना सम्मान के साथ साथ एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ,,,,,नारी एक information bank है ,,,,,वह सिर्फ एक घर का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का निर्माण करती है ,,,,,जिस तरह के संकल्प (thoughts ) उसके मन में आते हैं वह साकार होने लगते हैं ,,,,,,,,जब बच्चा गर्भ में होता है तो माँ की मनोस्थिति का बच्चे पर गहरा प्रभाव पड़ता है ,,,,,एक शरीर भोजन का सेवन करता है पर एक आत्मा का भोजन उसके मन में जन्म लेने वाले विचार होते हैं ,,,,आत्मिक बीज गर्भ में सिर्फ माता के द्वारा परोसा गया विचारों का भोजन करता है ,,,,और भोजन पर ही उसकी सेहत निर्भर करती है ,,,,,आज बच्चे भावनात्मक रूप से कमज़ोर (emotionally weak ) पैदा हो रहे हैं क्योंकि माता के खान पान का , दवा दारु का ध्यान रखा जाता है पर उसकी मानसिक स्थिति नज़रअंदाज़ होती है ,,,,जो स्त्री घर चलाती है वह घर में भोजन पकाते और परोसते हुए अपने मन में उठने वाले सभी संकल्पों को परोसती है ,,,,,और कहते हैं ना जैसा अन्न वैसा मन ,,,,, सारा दिन टीवी सीरियल्स देखने के बाद उसका मन बहुत ही नकारात्मक information से भर जाता है और फिर उसी सामान से वह वैचारिक मंथन कर आत्मिक भोजन बनती है ,,,,,,अब उसके मन में उठने वाले विचार इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह अपने मन को किस प्रकार की information से भर रही है ,,,,,निंदा , चुगली , ईर्ष्या , अपमान , दोषारोपण आदि वह सड़ी गली सामग्री है जिससे बना भोजन विनाशकारी है ,,,,,,,,,और यह भोजन सिर्फ स्त्री की ही नहीं अपितु पूरे परिवार की सेहत ख़राब करता है ,,,,,,,,,,,,,कहते हैं हम जैसा सोचते हैं वैसा ही बनते हैं ,,,,,,एक अच्छी सोच की जन्मदाता है नारी ,,,,,,,,उसके विचारों की सही और सकारात्मक दिशा इस धरती को स्वर्ग बना सकती है ,,,,पर उसके लिए ज़रूरी है कि हर स्त्री इस बात का पूरा ध्यान रखे कि वह स्वयं किस तरह की बातें सुनती और करती है और किस प्रकार के लोगों और माहौल में उसका अधिकतर समय बीतता है ,,,,,,,,,,,,,
सिमी मदन मैनी
मूसा वी ,ईसा वी , नानक वी , राम वी
जिदी गोदी विच खेड़े नवी ते इमाम वी
ऐसी का एक नारी की महिमा कि जिसकी गोद में देवी देवता भी खेले ,,,,,नारी इंसानियत की जन्मदाता है ,,,,फक्र होता है स्वयं पर कि मैं इस बार एक नारी के रूप में जन्मी ,,,,पर नारी होना सम्मान के साथ साथ एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ,,,,,नारी एक information bank है ,,,,,वह सिर्फ एक घर का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का निर्माण करती है ,,,,,जिस तरह के संकल्प (thoughts ) उसके मन में आते हैं वह साकार होने लगते हैं ,,,,,,,,जब बच्चा गर्भ में होता है तो माँ की मनोस्थिति का बच्चे पर गहरा प्रभाव पड़ता है ,,,,,एक शरीर भोजन का सेवन करता है पर एक आत्मा का भोजन उसके मन में जन्म लेने वाले विचार होते हैं ,,,,आत्मिक बीज गर्भ में सिर्फ माता के द्वारा परोसा गया विचारों का भोजन करता है ,,,,और भोजन पर ही उसकी सेहत निर्भर करती है ,,,,,आज बच्चे भावनात्मक रूप से कमज़ोर (emotionally weak ) पैदा हो रहे हैं क्योंकि माता के खान पान का , दवा दारु का ध्यान रखा जाता है पर उसकी मानसिक स्थिति नज़रअंदाज़ होती है ,,,,जो स्त्री घर चलाती है वह घर में भोजन पकाते और परोसते हुए अपने मन में उठने वाले सभी संकल्पों को परोसती है ,,,,,और कहते हैं ना जैसा अन्न वैसा मन ,,,,, सारा दिन टीवी सीरियल्स देखने के बाद उसका मन बहुत ही नकारात्मक information से भर जाता है और फिर उसी सामान से वह वैचारिक मंथन कर आत्मिक भोजन बनती है ,,,,,,अब उसके मन में उठने वाले विचार इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह अपने मन को किस प्रकार की information से भर रही है ,,,,,निंदा , चुगली , ईर्ष्या , अपमान , दोषारोपण आदि वह सड़ी गली सामग्री है जिससे बना भोजन विनाशकारी है ,,,,,,,,,और यह भोजन सिर्फ स्त्री की ही नहीं अपितु पूरे परिवार की सेहत ख़राब करता है ,,,,,,,,,,,,,कहते हैं हम जैसा सोचते हैं वैसा ही बनते हैं ,,,,,,एक अच्छी सोच की जन्मदाता है नारी ,,,,,,,,उसके विचारों की सही और सकारात्मक दिशा इस धरती को स्वर्ग बना सकती है ,,,,पर उसके लिए ज़रूरी है कि हर स्त्री इस बात का पूरा ध्यान रखे कि वह स्वयं किस तरह की बातें सुनती और करती है और किस प्रकार के लोगों और माहौल में उसका अधिकतर समय बीतता है ,,,,,,,,,,,,,
सिमी मदन मैनी
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