जीवन का हर एक क्षण कुछ ना कुछ झोली में डाल जाता है ,,,,इस जीवन रंग मंच पर घटने वाला हर पल कल्याणकारी है ,,,,,,,,हम कई बार इस गूढ़ रहस्य को समझ नहीं पाते और व्यर्थ चिंतन करते हैं ,,,,,,,बीता हुआ हर पल या तो हमें खुद से मिला देता है और या फिर सामने वाले व्यक्ति को परखने की क्षमता को बढ़ता है ,,,,,,,, अकसर जो घटना हमें अप्रिय लगती है उसके घटित होने के पीछे कोई ऐसा भेद होता है जिसे खुली आँखों से नहीं देखा जा सकता ,,,,,,यदि हमारा ईश्वर पर अटूट विश्वास होता है तो हमें हर पल को उसका प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लेना चाहिए ,,,,कठिन परिस्थितियों में ही व्यक्ति को अपनी क्षमता का एहसास और अपने और पराये की परख होती है ,,,,,,कभी यह ना कहें की समस्या बड़ी है बल्कि समस्या से कहें कि मेरा प्रभु बड़ा है ,,,,,,,,,,जीवन में हम अक्सर ऐसे लोगों से रिश्ता कायम करते हैं जो धन , मान , ओहदे में हमसे अधिक बलशाली हों ,,,,,,,,,,,,हम उनकी ताकत को अपनी ताकत समझ बैठते हैं और उसके बल पर अनैतिकता के मार्ग पर कब कदम बढ़ जाते हैं पता ही नहीं चलता ,,,,हम धन और ताकत के बल में चूर स्वयं से दूर हो जाते हैं ,,,,,,,,,,,,,,रिश्ते कभी भी किसी शर्त और मतलब की नींव पर नहीं पनपते ,,,,,,,,,,,,,रिश्ते तो दिल से बनते हैं ,,,,,,,,,,,,,,,दुनिया में किसी इंसान की इतनी हैसियत नहीं की वह हमारे लिए कुछ कर सके ,,,,,,,,,,,,मदद भी ईश्वर का इशारा होने पर ही नसीब होती है ,,,,,,,,,,,,,,सबसे बड़ा मददगार वो है ,,,,,,,मदद लेने की क्षमता हममें खुद में होनी ज़रूरी है ,,,,,,,,,,,,,,कहते हैं शेरनी का दूध केवल सोने के बर्तन में रख सकते हैं अन्यथा वह बर्तन फाड़ देता है ,,,,,,,ईश्वर से मदद हासिल करने की लिए हमें उस सोने के पात्र की तरह बनना होता है ,,,,,,, आडंबर करने की जगह उससे रिश्ता कायम करना पड़ता है ,,,,,,,,,,,,एक बार एक व्यक्ति ने एक पहलवान से दोस्ती की जोकि बहुत बलशाली था ,,,,,,,,,,,,,,,,,और अपने सच्चे मित्र को सदा अनदेखा किया ,,,,,,उसे सदा लगता की कठिन हालत में पहलवान से मदद मिलेगी ,,,,,,,,,,,,,,,,,एक दिन इस व्यक्ति के घर में आग लग गयी ,,,,,ईश्वर की माया देखिये उस दिन पहलवान घर पर नहीं था ,,,,,,,,,,,,,,,,,कमज़ोर मित्र चीखें सुन कर पानी की बाल्टी लेकर भागा ,,,,वह घर तो ना बचा सका पर उस दो बाल्टी पानी ने उस व्यक्ति की जान बचा दी ,,,,,,,और उसे ईश्वर ने एक अनमोल पाठ पढ़ा दिया कि उसकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता और मित्रता का आधार रुतबा या शानो शौकत नहीं बल्कि प्रेम है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिमी मदन मैनी