नमस्कार
आज अपने विचार आपके साथ बाँटते हुए मन कुछ भारी है ,,,,शायद लिखने से या बाँटने से कोई जवाब मिल जाये ,,,," एकता में बड़ी शक्ति है " ,,,,सुनने में बहुत अच्छा लगता है ,,,,शायद सच भी है ,,,,पर सिर्फ आसामाजिक तत्वों के लिए , अशिक्षित लोगों के लिए ,या फिर कट्टरवादी लोगों के लिए ,,,,आप सोचेंगें ऐसा क्यों ? सो आज सुबह की एक घटना आपके साथ बांटती हूँ ,,,, हर रोज़ की तरह कल प्रेस के लिए कपडे दिए ,,,सुबह कपडे टाँगते हुए देखा की एक कपडा हमारा नहीं है ,,,प्रेस वाले से बात कर रही थी तो वह साफ़ मुकर गया और कहने लगा कि यह कमीज तो किसी दूसरे है पर आप के कपडे इतने ही थे ,,,,,मैं जानती हूँ उसमें एक कपडा कम है ,,,,उसके गैर जिम्मेदाराना रवैये से मेरा पर चढ़ गया ,,,, जोकि शायद गलत है ,,,,यह व्यक्ति हमेशा से कपडे गुमाता आ रहा है पर फिर भी कोई ठोस कदम उसके खिलाफ नहीं लिया जा सकता ,,,, मैं जब उससे बात कर रही थी तो वह अनगिनत लोग थे जो हमें जानते थे ,,,,हर कोई उस बहस का लुत्फ़ उठा रहा था ,,,,और मुझे समझा रहा था ,,,,यह तो ऐसा ही है ,,,,क्या करें बरदाश्त करना ही पड़ता है ,,,,यह किसी और को काम भी तो नहीं करने देते ,,,,और मुझे यह बिन मांगा ज्ञान देकर धोबी को अपनी कपड़ों की गठरी पकड़ाते और आगे बढ़ जाते ,,,धोबी कहने लगा ज्यादा से ज्यादा क्या करोगे ?????? complaint करोगे ? ,,,,उससे क्या होगा ? ? ,,,,उसकी आदत इतनी पक चुकी है और वह इस बात को अच्छी तरह समझ चुका है कि एक अकेला क्या कर लेगा ?????? मैं किसी एक ऐसे व्यक्ति का इंतज़ार कर रही थी जो सही का साथ दे सके ,,,,पर अफ़सोस हम जितने अधिक शिक्षित और साधनों से भरपूर हो गए हैं उतने ही अधिक स्वार्थी हो गए हैं ,,,,हमे सिर्फ और सिर्फ अपने आराम से मतलब है ,,,,,क्या फर्क पड़ता है की पडोसी पर क्या बीतती है ,,,,,हम सरकार को कोसने के हकदार कैसे हुए ?,,,जब हम अपनी छोटी सी जिम्मेदारी नहीं समझ सकते ,,,,,,,,, सड़े गले सिस्टम बनाये हम और बदले सरकार ,,,,,इसी घटना का अब दूसरा रुख देखिये ,,,,,अगर आज चार लोग मेरे साथ उसे उसकी जिमेदारी का एहसास दिलाते तो वह पूरी कॉलोनी में किसी का नुकसान करने की हिम्मत नहीं होती ,,,,,,,,यही छोटी बातें आगे चल कर बड़ी हो जाती हैं ,,,,,,,,यह समझना ज़रूरी है कि अगर आज पडोसी के घर में आग लगी है तो मेरा घर भी उस तपन से ज़्यादा नहीं बचेगा ,,,,,,,,,,,,सिर्फ किताबें पढ़ना काफी नहीं सही मायनों में ज्ञान को जीवन में धारण करना ज़रूरी है ,,,,वक़्त पर सही का साथ देना ज़रूरी है ,,,,,,,,,,देश और सामज के सुधार की शुरुवात घर से होती है ,,,और चूहे बिल घर की उसी दीवार पर बनाते हैं जो कमज़ोर है ,,,,,,,,,,ध्यान रहे हम वो कमज़ोर दीवार ना बन जाएँ ,,,,,,,,,,,,बड़े शर्म की बात है अशिक्षित हो कर भी इन लोगों में एकता है और वो हमें हमारे कमज़ोर होने का एहसास दिलाती है ,,,,,,,,,,,,हमारे सुख ,सुविधा और आराम ने हमें इन लोगों का गुलाम बना दिया है और हम एकता के बल को भुला बैठे हैं ,,,,,,
सिम्मी मैनी
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