कुछ दिन पहले पड़ोस में एक जवान मौत हुई ,,,,बहुत दुखद घटना थी ,,,,अकस्मात् जीवन से यूँ ही किसी का चले जाना दुःख को और भी बढ़ा देता है और एक अपनों का जीवन एक खालीपन से भर जाता है ,,,,,लोगों की आँखों में आँसू और दिवंगत आत्मा के लिए दुआएँ थी ,,,,पूरा माहौल शोकग्रस्त था ,,,,,हममे से कभी भी कोई भी इस तरह जीवन के रंगमंच को छोड़ कर जा सकता है ,,,,जब कोई जाता है तो हम उसका शोक तो करते है लेकिन क्या हम उससे कुछ सीखते है ? ,,,,,शरीर का छूट जाना किसी के बस में नहीं फिर भी हम उसका शोक मनाते हैं ,,,, लेकिन जो रिश्ते हमारे जिन्दा रहते हुए हर घडी मर रहे हैं ,,,,क्या हमें उसका कोई अफ़सोस होता है ? ,,,,क्या हम उसकी जिम्मेदारी उठाते हैं ?,,,,,शायद नहीं ,,,,,,,इन्हे सहेज कर रखना सिर्फ और सिर्फ हमारे बस में होता है ,,,,,,ज़रूरी है की सिर्फ हम मौत पर आँसू बहाने की जगह जिन्दा लोगों से रिश्ते मज़बूत करें ,,,,,कम से कम टूटते हुए रिश्ते को जोड़ने की पहल करें ,,,,,,,,,पहल करने से इंसान छोटा नहीं बड़ा होता है ,,,,कर्मों के अनुसार यूँ तो हर रिश्ते का समय है ,,,,,,फिर भी उस रिश्ते में हमारा जो रोल है उसे ईमानदारी से निभाएं ,,,,,,,,बाकि सामने वाले और ईश्वर पर छोड़ दें ,,,,,,,,कल को अगर किसी वजह से रिश्ता मर भी जाता है तो कम से कम आपको अफ़सोस नहीं होगा की आपने उसे बचाने का प्रयास नहीं किया ,,,,,अपने अहं को एक तरफ रख दें ,,,,,,,,,आपको हिम्मत अपने आप मिल जाएगी ,,,,,सामने वाले का इंतज़ार ना करें ,,,,,,,,इंसान छोटा या बड़ा अपने संस्कार और सोच से होता है ,,,,अगर आप पहल करते हैं किसी रिश्ते को जोड़ने की तो आप अपनी नज़रों में ऊपर उठ जाते है ,,,,,,,आज तक तो हर कार्य सिर्फ दूसरों की नज़रों में ऊपर उठने के लिए किया पर सच्चा सुख अपनी नज़रों में ऊपर उठने में है ,,,,,,,,,,,हर रोज़ रात को ईश्वर से कहना मैंने अपना होमवर्क पूरा किया ,,,,उसका परिणाम आप पर और वक़्त पर छोड़ते हैं ,,,,,,,,,,हम मृत शरीर में तो नहीं पर मृत रिश्तों में प्राण फूँक सकते हैं ,,,,और ऐसा करने से हम महान कलाकार बनते हैं क्यूंकि अब हम एक सुखद और प्रेममयी कल को आकार दे रहे हैं ,,,,,,,,,,
सिमी मदन मैनी
सिमी मदन मैनी
No comments:
Post a Comment