Friday, 17 October 2014

सीलन



                      सीलन


कुछ दिन बाद
दिवाली दस्तक देगी दरवाज़े
उसके स्वागत को घर में
पुताई का काम जारी है

इस दीवार को जाने
कितनी बार रंग डाला
पर रह रह कर पपड़ी
झड़ने लगती है ,,,,
सफेदी वाला बोल उठा
मैडम !,,,ऊपर ऊपर
रंग पोतने से कुछ ना होगा
रंग कितना ही अच्छा हो
जड़ में मरमम्त चाहिए
यह सीलन है जो रह रह कर
दीवार को खोखला कर देती है
और सुन्दर दिखने वाले घर में
पुरानी सीलन के यह पैबंद
छुपाये नहीं छुपते ,,,,,,


"सच कहते हो भैया ",,,
जैसे हमारी व्यवहार कुशलता
और खोखली हंसी  का रंग रोगन
दूसरों को छल नहीं सकता
और कड़े संस्कारों  और
छोटी सोच की सीलन
हमारी  असलियत
बयां कर देती है
और हमारे व्यक्तित्व पर
लगा पैबंद साफ़ छलकने लगता है

चलो ,,,,प्लास्टर छील  कर
जड़ से मरम्मत करो
और रंग दो इस दीवार को
एक सुन्दर रंग से
क्योंकि
मैं  नहीं चाहती कि
मेरे विचारों की सीलन
इस घर को मकान बना दे




सिमी  मदन  मैनी




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