Monday, 27 October 2014

कुछ दिन पहले पड़ोस में एक जवान मौत हुई ,,,,बहुत दुखद घटना थी ,,,,अकस्मात् जीवन से यूँ ही किसी का चले जाना दुःख को और भी बढ़ा देता है और एक अपनों का जीवन एक खालीपन से भर जाता है  ,,,,,लोगों की आँखों में आँसू और दिवंगत आत्मा के लिए दुआएँ थी ,,,,पूरा माहौल शोकग्रस्त था ,,,,,हममे से कभी भी कोई भी इस तरह जीवन के रंगमंच को छोड़ कर जा सकता है ,,,,जब कोई जाता है तो हम उसका शोक तो करते है लेकिन क्या हम उससे कुछ सीखते है ? ,,,,,शरीर का छूट जाना किसी के बस में नहीं फिर भी हम उसका शोक मनाते  हैं ,,,,  लेकिन जो रिश्ते हमारे जिन्दा रहते हुए हर घडी मर रहे हैं ,,,,क्या हमें उसका कोई अफ़सोस होता है ? ,,,,क्या हम उसकी जिम्मेदारी उठाते हैं ?,,,,,शायद नहीं ,,,,,,,इन्हे सहेज कर रखना सिर्फ और सिर्फ हमारे बस में होता है ,,,,,,ज़रूरी है की सिर्फ हम मौत पर आँसू बहाने की जगह जिन्दा लोगों से रिश्ते मज़बूत करें ,,,,,कम  से कम टूटते हुए रिश्ते को जोड़ने की पहल करें ,,,,,,,,,पहल करने से इंसान छोटा नहीं बड़ा होता है ,,,,कर्मों के अनुसार यूँ तो हर रिश्ते का समय है ,,,,,,फिर भी उस रिश्ते में हमारा जो रोल है उसे ईमानदारी से निभाएं ,,,,,,,,बाकि सामने वाले और ईश्वर पर छोड़ दें ,,,,,,,,कल को   अगर किसी वजह से रिश्ता मर  भी जाता है तो कम से कम आपको अफ़सोस नहीं होगा की आपने उसे बचाने  का प्रयास नहीं किया ,,,,,अपने अहं को एक तरफ रख दें ,,,,,,,,,आपको हिम्मत अपने आप मिल जाएगी ,,,,,सामने वाले का इंतज़ार ना करें ,,,,,,,,इंसान छोटा या बड़ा अपने संस्कार और सोच से होता है ,,,,अगर आप पहल करते हैं किसी रिश्ते को जोड़ने की तो आप अपनी नज़रों में ऊपर उठ जाते है ,,,,,,,आज तक तो हर कार्य सिर्फ दूसरों की नज़रों में ऊपर उठने के लिए किया पर सच्चा सुख अपनी नज़रों में ऊपर उठने में है ,,,,,,,,,,,हर रोज़ रात को ईश्वर से कहना मैंने अपना होमवर्क पूरा किया ,,,,उसका परिणाम आप पर और वक़्त पर छोड़ते हैं ,,,,,,,,,,हम मृत शरीर में तो नहीं पर मृत रिश्तों में प्राण फूँक सकते हैं ,,,,और ऐसा करने से हम महान कलाकार बनते हैं क्यूंकि अब हम एक सुखद और प्रेममयी कल को आकार दे रहे हैं ,,,,,,,,,,

सिमी  मदन  मैनी    

Wednesday, 22 October 2014

दिवाली


इस दिवाली आपको
कुछ  खास देना चाहती हूँ
बहुत ढूंढा बाजार में पर
ख़ोज अधूरी रही

तभी ख्याल आया
क्यों ना आपको
अपनी दुआओं का वारसा सौंप दूँ
इस खास मौके पर
शायद आपको
दुआओं का यह तोहफा
पसंद आये
प्रार्थना है प्रभु से
कि इस दिवाली

आपके मन मंदिर में जलें
ज्ञान का दीपक
जो नफरत का मैल  मिटा दे

उम्मीद की लड़ियों से सजे
आपकी सोच
जो आपका भविष्य दमका दे

प्रेम और शांति की रंगोली से
सजे आपका अनमोल जीवन
और आपको इंसान से फरिश्ता बना दे

पवित्रता और ख़ुशी की वंदनवार
सजे आपके दरवाज़े
और आपके घर को स्वर्ग बना दे

माँ लक्ष्मी और सरस्वती
खुद चल कर आये आपके घर
और आपकी जीवन बगिया  को
अपनी  रेहमत से महका दे

अपनों की  फुलजडियों  से
आबाद रहे आपका जीवन
और रिश्तों को मज़बूत बना दे


"सिम्मी ' और क्या दे सकती है ?
इस दुआ के सिवा
कि ,,,,,
परमात्मा हर कदम पर
आपका साथ निभा दे


दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ

सिमी  मदन   मैनी

Friday, 17 October 2014

सीलन



                      सीलन


कुछ दिन बाद
दिवाली दस्तक देगी दरवाज़े
उसके स्वागत को घर में
पुताई का काम जारी है

इस दीवार को जाने
कितनी बार रंग डाला
पर रह रह कर पपड़ी
झड़ने लगती है ,,,,
सफेदी वाला बोल उठा
मैडम !,,,ऊपर ऊपर
रंग पोतने से कुछ ना होगा
रंग कितना ही अच्छा हो
जड़ में मरमम्त चाहिए
यह सीलन है जो रह रह कर
दीवार को खोखला कर देती है
और सुन्दर दिखने वाले घर में
पुरानी सीलन के यह पैबंद
छुपाये नहीं छुपते ,,,,,,


"सच कहते हो भैया ",,,
जैसे हमारी व्यवहार कुशलता
और खोखली हंसी  का रंग रोगन
दूसरों को छल नहीं सकता
और कड़े संस्कारों  और
छोटी सोच की सीलन
हमारी  असलियत
बयां कर देती है
और हमारे व्यक्तित्व पर
लगा पैबंद साफ़ छलकने लगता है

चलो ,,,,प्लास्टर छील  कर
जड़ से मरम्मत करो
और रंग दो इस दीवार को
एक सुन्दर रंग से
क्योंकि
मैं  नहीं चाहती कि
मेरे विचारों की सीलन
इस घर को मकान बना दे




सिमी  मदन  मैनी




Thursday, 16 October 2014

प्रेशर कुकर

               

                 प्रेशर कुकर

गैस चूल्हे पर सीटियाँ  बजाता
कुकर
शायद कोई सन्देश देना चाहता है
आंच पर चढ़ा कुकर
मुझे आवाज़ लगता है
दौड़ कर जाती हूँ मैं
और आँच धीमी कर देती हूँ
उफ्फ !!!!!!!
गर भूल जाती तो ?
फट जाता कुकर
एक बादल की तरह
और बिखर जाता
तहस नहस होकर
मेरी रसोई में

कितना मिलता है ना कुकर
मेरे मन से ,,,,
जब भी पकते हैं नकारात्मक विचार
इस भोले मन में ,,,
कुछ देर तो मन
चुप रहता है
फिर बजती है सीटी
परेशानी और टेँशन  की
गर ना दिया ध्यान
और ना  किया  इन विचारों की
आंच को कम  तो
कुछ और तेज़ सीटियाँ
किसी बिमारी की
सारी ऊर्जा खींचते हुए
और अंत में
 डिप्रेशन का एक धमाका
और बिखर जाता है
अस्तित्व और आत्म सम्मान
चिथड़े चिथड़े होकर


जल जाती है ख़ुशी
लापरवाही की आग में
और हम सोचते हैं
कि ,,,,
काश वक़्त रहते
मन की आवाज़ को सुन लेते
और धधकते मन
पर आध्यातम का पानी डाल देते
तो नकारात्मक विचारों की आंच
कुछ शांत हो जाती और
यह भोला मन बच जाता

सिमी  मदन मैनी





Saturday, 11 October 2014

मेहंदी

नमस्कार

कल करवाचौथ के दिन सभी के हाथ मेहंदी से सुर्ख लाल थे,,,,,सुन्दर डिजाइन और महकते हाथ ,,,,इन हाथों को देख जो भाव मन में उपजे ,,,,,आपके साथ बाँट रही हूँ ,,,,


                      मेहंदी


सुहागनों के हाथों में रची मेहंदी
रिश्तों के रंग को फिर गहरा गई
खुद पिसी और पिस कर भी
किसी का जीवन सजा गई
उम्मीद और दुआ के ऐसे रंग भरे
इन दो हाथों में कि ,,,,,
जीवन का सार सीखा गई ,,,

यूं  ही नहीं लगती नव वधु के हाथों में
शायद कुछ कहना चाहती है ,,,
एक रिश्ते से कितने और नए रिश्ते
पनपते हैं ,,,,
दुल्हन को आईना  दिखला गई
रिश्तो को जोड़ के किस तरह रखना है
पवित्र बंधन का पहला सबक सीखा गई

पति से जुड़े हर रिश्ते को किस तरह
प्रेम और समझदारी से संवारे यह हाथ
कानों  में होले से बतला गई
जीवन में खुशियों का रंग सदा बना रहे
और जीवन साथी की हर जिम्मेदारी अपनी हो
हाथों को महकाते हुए
यह शिक्षा सुना गई

मेहंदी सिर्फ फ़ैशन या श्रृंगार की वस्तु  नहीं
नए बंधन जोड़ने की कड़ी है
प्रेम और त्याग से जीवन किस तरह रंगना है
और किस तरह मेहकाना है घर आँगन
आज अपना अस्तित्व मिटा कर
सबको यह हुनर सीखा गई
हुनर सीखा गई

सिम्मी  मदन मैनी






Saturday, 4 October 2014


नमस्कार

आज अपने विचार आपके साथ बाँटते  हुए मन कुछ भारी  है ,,,,शायद लिखने से या बाँटने  से कोई जवाब मिल जाये ,,,," एकता में बड़ी शक्ति है " ,,,,सुनने में बहुत अच्छा लगता है ,,,,शायद सच भी है ,,,,पर सिर्फ आसामाजिक  तत्वों के लिए , अशिक्षित लोगों के लिए ,या फिर कट्टरवादी लोगों के लिए ,,,,आप सोचेंगें ऐसा क्यों ? सो आज सुबह की एक घटना आपके साथ बांटती हूँ ,,,, हर रोज़ की तरह कल प्रेस के लिए कपडे दिए ,,,सुबह कपडे टाँगते हुए देखा की एक कपडा हमारा नहीं है ,,,प्रेस वाले से बात कर रही थी तो वह साफ़ मुकर गया और कहने लगा कि यह कमीज तो किसी दूसरे है पर आप के कपडे इतने ही थे ,,,,,मैं जानती हूँ उसमें एक कपडा कम  है ,,,,उसके गैर जिम्मेदाराना रवैये से मेरा पर चढ़ गया ,,,, जोकि शायद गलत है ,,,,यह व्यक्ति हमेशा से कपडे गुमाता  आ रहा है पर फिर भी कोई ठोस कदम उसके खिलाफ नहीं लिया जा सकता ,,,, मैं जब उससे बात कर रही थी तो वह अनगिनत लोग थे जो हमें जानते थे ,,,,हर कोई उस बहस का लुत्फ़ उठा रहा था ,,,,और मुझे समझा रहा था ,,,,यह तो ऐसा ही है ,,,,क्या करें बरदाश्त करना ही पड़ता है ,,,,यह किसी और को काम भी तो नहीं करने देते ,,,,और मुझे यह बिन मांगा  ज्ञान देकर धोबी को अपनी कपड़ों की गठरी पकड़ाते  और आगे बढ़ जाते ,,,धोबी कहने लगा ज्यादा से ज्यादा क्या करोगे ?????? complaint  करोगे ? ,,,,उससे क्या होगा ? ? ,,,,उसकी आदत इतनी पक चुकी है और वह इस बात को अच्छी तरह समझ चुका  है कि  एक अकेला क्या कर लेगा ?????? मैं  किसी एक ऐसे व्यक्ति का इंतज़ार कर रही थी जो सही का साथ दे सके ,,,,पर अफ़सोस हम जितने अधिक शिक्षित और साधनों  से भरपूर हो गए  हैं उतने ही अधिक स्वार्थी हो गए हैं ,,,,हमे सिर्फ और सिर्फ अपने आराम से मतलब है ,,,,,क्या फर्क पड़ता है की पडोसी पर  क्या बीतती है ,,,,,हम सरकार को कोसने के हकदार कैसे हुए ?,,,जब हम अपनी छोटी सी जिम्मेदारी नहीं समझ सकते ,,,,,,,,,  सड़े गले सिस्टम बनाये हम और बदले सरकार ,,,,,इसी घटना का अब दूसरा रुख देखिये ,,,,,अगर आज चार लोग मेरे साथ उसे  उसकी जिमेदारी का एहसास दिलाते तो वह पूरी कॉलोनी में किसी का नुकसान करने की हिम्मत नहीं होती ,,,,,,,,यही छोटी बातें आगे चल कर बड़ी हो जाती हैं ,,,,,,,,यह समझना ज़रूरी है  कि  अगर आज पडोसी के घर में आग लगी  है तो  मेरा घर भी उस तपन से ज़्यादा नहीं बचेगा ,,,,,,,,,,,,सिर्फ किताबें  पढ़ना काफी नहीं सही मायनों में ज्ञान को जीवन में धारण करना ज़रूरी है ,,,,वक़्त पर सही का साथ देना ज़रूरी है ,,,,,,,,,,देश और सामज के सुधार  की शुरुवात घर से होती है ,,,और चूहे बिल घर की उसी दीवार पर बनाते हैं जो कमज़ोर है ,,,,,,,,,,ध्यान रहे हम वो कमज़ोर दीवार ना बन जाएँ ,,,,,,,,,,,,बड़े शर्म की बात है अशिक्षित हो कर भी इन लोगों में एकता है और वो हमें हमारे कमज़ोर होने का एहसास दिलाती है ,,,,,,,,,,,,हमारे सुख ,सुविधा और आराम ने हमें  इन लोगों का गुलाम बना दिया है  और हम एकता के बल को भुला बैठे हैं ,,,,,,


सिम्मी मैनी 

Wednesday, 1 October 2014




सुप्रभात मित्रों

आज गाँधी जयंती के अवसर पर बापू के अनेकों अनेक गुण दिल पर दस्तक दे रहे हैं ,,,,एक व्यक्ति जो शारीरिक रूप से शायद इतना आकर्षक नहीं था ,बहुत कम ज़रूरतें ,और सादा जीवन ,,,,,एक ऊँची सोच ,अलग नज़रिया और लोगों को स्वयं से जोड़ लेने की अद्धभुत क्षमता ,,,,जाने कितनी ही ऐसी बातें हैं इस महान व्यक्तित्व के बारे में जिन्हे याद कर के सर क्ष्रद्धा से झुक जाता है ,,,,आज जहाँ व्यक्ति लम्बे भाषण ,नाम और रुतबे के दम पर अपनी पहचान बनाना चाहता है उन्होंने अपनी सादगी ,अहिंसा और धृण निश्चय के बल पर पूरे देश को अपने पद चिन्हों पर चलाया और हमें गुलामी की ज़ंजीरों से मुक्त कराया ,,,,वह एक निडर व्यक्तित्व के मालिक थे ,,,कितनी आसानी से सभी सुख सुविधाओं का परित्याग कर दिया और सिर्फ एक धोती और लाठी ने वह कमाल कर दिखाया जो बेशुमार दौलत और रुतबा नहीं कर सकता ,,,,आज इस अवसर पर भारत में स्वछता अभियान का आरम्भ हो रहा है ,,,,देश की सफाई के साथ साथ मन की सफाई भी आवश्यक है ,,,,आज भारतीय नोट पर जब गांधी जी का चित्र देखती हूँ तो मन विचलित हो जाता है ,,,,हर बार जब पैसा हाथ में होता है तो
संकल्प आता है मन में ,,,,क्या यह कमाई मेह्नत  की है ? ,,,क्या जो पैसा में घर में अपनी संतान के पालन पोषण में इस्तेमाल कर रही हूँ वह ठीक तरीके से कमाया गया है ,,,क्योंकि धन एक भी एक महत्वपूर्ण साधन है जो हमारा चरित्र निर्माण करता है ,,,,इसी के कारण इंसान सभी दुष्कर्म करता है और दलदल में धंसता चला जाता है ,,,,,इसी प्रकार जब पैसा खर्चना होता है तो मन खुद से सवाल करता है ,,,क्या इतने महत्वपूर्ण साधन का इस्तेमाल सही स्थान पर और सही तरीके से किया है ,,,और इस खर्च से चरित्र निर्माण  होगा ?सफाई का आरम्भ मन से करें देश स्वयं ही पवित्र हो जायेगा ,,,,स्वछता एक संस्कार है ,,,जब इसकी आदत पड़ जाती है तो मन , स्थान और सोच सब पवित्र हो जाता है ,,,,गांधी जी का चित्र मुझे हर बार यह सन्देश देता है की धन का सदुपयोग यदि हर व्यक्ति करे तो हमारा देश संसार के शीश पर कोहिनूर की तरह जगमगाता रहे ,,,,,,,

सिम्मी मैनी


good morning friends

on this auspicious occasion of gandhi jayanti i am thinking of bapu,s strengths and qualities ,,,i am bound to bow my head in front of a great personality  who was physically not very strong and attractive but had limited needs , simple living and high thinking was his motto , owner of different and unique thought process , and person who had great ability to enroll people ,,,,in present times which money , authority and power can not create , he created with his simplicity ,,,,the whole nation was being enrolled and india was declared as a free nation ,,,,he was a fearless personality who left all his comforts easily and his lathi and dhothi created what financial treasures and ultimate authority could  never create ,,,,,today cleanliness campaign has been declared  in our country on this occasion ,,,,but i think before we work on physical cleanliness it is important to clean our thoughts ,,,,whenever i look at bapu,s image on indian currency ,,,it reminds me of  his great character , qualities and strengths ,,,i am bound to think that is it my hard earned money? and how i have earned this most important resource? because this
 will built my children character, future and destiny ,,,,similarly whenever i spend money  i thought  comes to my mind weather this will be used in constructing or destructing my qualities and character ? cleanliness is a deep rooted sanskar ,,,,once we have this sanskar of purity  it is present in all areas of our life ,,, in our thoughts , environment  and country ,,,, image of gandhi ji always tells me that if each one of us use our financial resources in right way our country will surely make its  own mark world wide

simmi maini