भूख
उफ्फ्फ!!!!
यह भूख भी
इंसान को
क्या से क्या
बना देती है
इतनी बलवान
है यह भूख
कि उसूलों ,आदर्शों को
जड़ से हिला देती है
भूख पेट की
सम्मान की
प्रशंसा की
पहचान की
धन की
मान की
तालियों की
गडगडाहट की
नाम की
जब लेती है
भूख अंगड़ाई
तो तूफ़ान
आते हैं
और इस ज़लज़ले में
कमज़ोर लोग
अपना अच्छा बुरा
कहाँ सोच पाते हैं?
गिरवी होते हैं ज़मीर
और हम
नामुराद भूख के
गुलाम बन जाते हैं
बस शांत करनी है भूख
और आगे बढ़ना है
क्या हमें अपने स्वाभिमान
की कब्र पर
अपनी खोखली
पहचान का
नया इतिहास गढ़ना है??
सिम्मी मैनी भूख
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