सपना
अभी जीवित हूँ
दिल के किसी कोने में
दुबका हुआ
एक सुलगती चिंगारी
जिसे वक़्त कि हवा
नसीब ना हुई
जाने कितनी चिकित्सक
गायिका ,नर्तकी
लेखिका ,कवियत्री
और अध्यापिका
इन सपनों में कैद हैं
दोष मुझे मत देना
कसूर मेरा नहीं
क़ाबलियत भी थी तुममे
और डोर भी
तुम्हारे हाथ थी
पर तुम्ही ने कहा
इन सबको मरना होगा
ताकि तुम अपना वजूद मिटा कर
हर किसी को खुश रख सको
पर ऐसा हो ना सका
जानती हो क्यों ?
क्योंकि तुम खुश नहीं थीँ
हर किसी को खुश रख सको
पर ऐसा हो ना सका
जानती हो क्यों ?
क्योंकि तुम खुश नहीं थीँ
सिम्मी मदन मैनी
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