Wednesday, 27 June 2012

ख्वाब

   ख्वाब

मेरी दुआ है कि
कोई आँख 
रूखी ना रहे
हर आँख में हरदम
एक बड़ा ख्वाब
तैरना चाहिए
हर बड़ी उपलब्धी 
हर बड़ा बदलाव
पहले एक ख्वाब था
जो किसी दिलवाले ने देखा

कौन जानता था कि 
हम हवा में परिंदों से
उड़  पाएंगे ,,,,,
या फिर कभी चाँद की
सैर को जाएँगें,,,,
यह भी तब 
एक  खवाब होगा
एक धुंदली तस्वीर
जिस में किसी ने
विश्वास के रंग भरे होंगे 
और हिम्मत के केनवस पर 
बनी इस तस्वीर ने,,,
उस ख्वाब पर हंसने वालों के 
मुँह  सी दिए होंगे,,,,,

तो क्यों ना हम भी
दिल ख़ोल के सपने देखें 
जाने किसने कह दिया ?
जितनी चद्दर उतने पैर पसारो
मैं  तो कहती हूँ 
चलिए,,,,,,
हम  अपनी 
सोच  की हदों को बढ़ा कर
 अपने ख्वाबों की चद्दर को
 इतना  बड़ा कर लें कि
तमाम खुशियाँ भी
उसमें समाने को
कम पड़ जाएँ 

यकीन मानिये 
मैं झूठ नहीं कहती
ये सपने ही हैं
जो एक दिन 
हकीकत बन जाते हैं
मेरी आँखें तो किसी 
बड़े सपने की
तलाश में हैं 
क्या आपकी आँखों में  भी
कोई बड़ा सपना तैरता है?

सिम्मी मैनी 

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